मालाबार पिट वाइपर को रॉक वाइपर के रूप में भी जाना जाता है.
वन मंडल के डीएफओ गुरुनाथन एन कोरबा (DFO Gurunathan N Korba) ने बताया कि इसका पाया जाना कोरबा के जंगलों की समृद्धता को दर्शाता है. इसे विशिष्ट शोध के लिए उच्च संस्थानों को भेजा जाएगा व इसके संरक्षण के लिए कार्य किया जाएगा.
कोरवा वन मंडल के डीएफओ गुरुनाथन एन कोरबा ने बताया कि इसका पाया जाना कोरबा के जंगलों की समृद्धता को दर्शाता है. इसे विशिष्ट शोध के लिए उच्च संस्थानों को भेजा जाएगा व इसके संरक्षण के लिए कार्य किया जाएगा. मालाबार पिट बइपर जो पश्चिम घाटों में है एडेमिक है. इसके दो मॉर्फ हरे और भूरे पाए जाते हैं. यहां पर हरे मार्फ की प्रजाति मिली है जो जुवेनाइल अवस्थां में है. इस प्रजाति के सांपों के क्षेत्र में और पाए जाने की संभावना में है. छत्तीसगढ़ विज्ञान सभा से उपाध्यक्ष दिनेश कुमार वेदव्रत, कमला नेहरू महा विद्यालय की विभागाध्यक्ष प्रो. निधि सिंह व रेप्टाइल केयर एंड रेस्कू सोसाइटी के अध्यक्ष अविनाश यादव प्रकश तेंदुलकर रिसर्च टीम में शामिल थे.
मालाबार पिट वाइपर कितना जहरीला सांप है
मालाबार पिट वाइपर को रॉक वाइपर के रूप में भी जाना जाता है. यह अपने शिकार को मारते समय अपनी सटीकता और विष में ज्यादा घातक होता है. ये निशाचर सरीसृप दक्षिण-पश्चिमी भारत में धाराओं के पास जमीनी चट्टानों और पेड़ों पर पाए जाते हैं. सबसे कुशल विषैले सांप हैं. इसका विष मुख्य रूप से शिकार के रक्त और मांसपेशियों पर कार्य करता है. कहा जाता है कि वाइपर के दो मुख्य समूह हैं. पिट वाइपर में अन्य वाइपर के विपरीत चेहरे पर बड़े हीट-सेंसिंग गड्ढे होते हैं, जो इस क्षमता के बिना होते हैं. ये बड़े हीट सेंसिंग पिट्स इसके सिर के प्रत्येक तरफ, नासिका और आंख के बीच में स्थित होते हैं. कभी-कभी गर्मी के गड्ढे नथुने से बड़े होते हैं. यह गर्म खून वाले शिकार द्वारा दी गई गर्मी का पता लगा सकता है. इसके सिर को साइड से मोड़कर, एक पिट वाइपर अपने शिकार की दिशा का पता लगा सकता है.धीमी गति से चलने वाला सांप और निशाचर है
पिट वाइपर एक धीमी गति से चलने वाला सांप और निशाचर है. अपने आप को बचाने के लिए धीमी गति चलता है. साथ ही परेशान होने पर तेज हमले और काटने में सक्षम है. इस सांप के भोजन में कृंतक, छिपकली, पक्षी और मेंढक जैसे छोटे स्तनधारी शामिल हैं. मादा ४ या ५ जीवित युवा को जन्म देती है.