तेलंगाना से बिहार साइकिल पर निकले मजदूर, छत्तीसगढ़ पहुंचते टूटी हिम्मत, बोले- घर पहुंचा दो | sukma – News in Hindi

तेलंगाना से बिहार साइकिल पर निकले 18 मजदूर, छत्तीसगढ़ पहुंचते टूटी हिम्मत, बोले- घर पहुंचा दो

मजदूर सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं.

तेलंगाना से 18 मजदूर साइकिल चलाकर छत्तीसगढ़ के बॉर्डर कोंटा पहुंचे थे. पिछले 3 दिन से तेज गर्मी और चिलचिलाती धूप में साइकिल पर सवार होकर ये मजदूर अपने घर बिहार जाने के लिए निकले थे.

सुकमा. मजदूरों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि ऐसा दिन देखने को मिलेगा. तेलंगाना (Telangana) से साइकिल पर सवार होकर बिहार (Bihar) जा रहा मजदूरों की तो छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बॉडर पर ही हिम्मत टूट गई. अब वो साइकिल बेचकर बस से घर जाना चाहता है. क्योंकि ब्याज के पैसों से ली गई साइकिल (Cycle) चलाने की हिम्मत ही नहीं बची. मजदूर अब सरकार से मदद की गुहार लगा रहे हैं. उनका कहना है कि हमें सही सलामत बस घर पहुंचा दो.

तेलंगाना से 18 मजदूर साइकिल चलाकर छत्तीसगढ़ के बॉर्डर कोंटा पहुंचे थे. पिछले 3 दिन से तेज गर्मी और चिलचिलाती धूप में साइकिल पर सवार होकर ये मजदूर अपने घर बिहार जाने के लिए निकले थे. उन्होंने बताया कि वो तेलंगाना के कोदाड़ में काम करने गए थे. लेकिन काम शुरू करने से पहले लॉकडाउन हो गया. मजदूरों का आरोप है कि वहां पर कंपनी ने खाना देने से मना कर दिया था. तो फिर सभी ने वापस आने के लिए साइकिल खरीदी और निकल पड़े. लेकिन रास्ते में बहुत परेशानी हुई. ना तो हमें भाषा की समझ थी और ना ही रास्ते का ज्ञान, ऐसे में यहां तक पहुंचते-पहुंचते हालत खराब हो गई.

ब्याज पर घरवालों से मंगवाए पैसे से ली साइकिल

मजदूरों ने बताया कि उन्होंने घर वालों से पैसे मंगवाए क्योंकि उनके पास खाने तक के के पैसे नहीं थे. वहां की सरकार ने जो चावल दिया था वो कुछ ही दिनों में खत्म हो गया था. उसके बाद हमारे सामने खाने के लाले पड़ने लग गए थे. ऐसे में घर वालों को फोन किया. क्योंकि फिलहाल ट्रेन और बस चलने के कोई आसार नहीं है ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर हमारे परिजनों ने उधार लेकर पैसे हमे बैंक के माध्यम से भिजवाए. उसके बाद हम लोगों ने साइकिल खरीदी और घर के लिए रवाना हो गए.सरकार से गुहार

इन मजदूरों ने सपना देखा था कि बाहर कमाने जाएंगे और अपने परिवार का भरण-पोषण करेंगे. लेकिन कहते है न सपने तो किस्मत वालों के सच होते हैं. शायद ये ही बात ये मजदूर भी सोच रहे होंगे. पैर के छाले और मीलों लंबा सफर. इस मजदूरों की परेशानी का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है. अब शायद इन्हें सपने देखने से भी डर लगेगा. मजदूरों की अब एक ही ख्वाहीश है घर वापसी. सरकार से मजदूर बस इतना ही चाहते हैं कि उन्हें सही सलामत उनके घर तक पहुंचा दिया जाए.

वहीं न्यूज 18 से चर्चा करते हुए एसडीएम हिमाचल साहू का कहना है कि बाहर से आ रहे मजदूरों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है. प्रवासी मजदूरों के खाने की व्यवस्था भी कर रहे हैं. मजदूरों को धीरे-धीरे व्यवस्था के मुताबिक घर भेजा जा रहा है.

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First published: May 16, 2020, 6:22 AM IST




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