नक्सलवाद गायब, दंतेवाड़ा के जंगलों में डॉक्टर्स की दस्तक, मरीजों के लिए 13 KM का पहाड़ी सफर तय

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दंतेवाड़ा जिले के दूर-दराज और पहाड़ी इलाके में स्थित बड़ेपल्ली गांव में अब सुविधाएं धीरे-धीरे लोगों तक पहुंचने लगी हैं. एक समय ऐसा था जब यह गांव नक्सल प्रभाव और कठिन रास्तों के कारण विकास की मुख्यधारा से काफी दूर माना जाता था. लेकिन अब स्वास्थ्य विभाग की टीम कठिन रास्तों और जंगलों को पार कर गांव तक पहुंच रही है, ताकि लोगों को उनके घर के पास ही इलाज और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें. डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों ने करीब 13 किलोमीटर का पैदल सफर तय कर गांव के लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया और जरूरी दवाइयां उपलब्ध कराईं.

दंतेवाड़ा के जंगलों में डॉक्टर्स की दस्तक, मरीजों के लिए 13 KM का पहाड़ी सफरZoom

दंतेवाड़ा के जंगलों में पहुंचे डॉक्टर्स

दंतेवाड़ा के घने जंगलों और कठिन पहाड़ियों के बीच बसे गांव बड़ेपल्ली में अब बदलाव की नई तस्वीर दिखाई देने लगी है. कभी नक्सल प्रभाव और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण सरकारी सेवाओं से दूर माने जाने वाले इस गांव तक अब स्वास्थ्य विभाग की टीम लगातार पहुंच रही है. ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीम ने 13 किलोमीटर लंबा कठिन पहाड़ी रास्ता पैदल तय कर बड़ेपल्ली पहुंचकर स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया.

स्वास्थ्य विभाग की टीम ने लोगों की बीमारियां का किया परीक्षण

जंगलों और पथरीले रास्तों से गुजरकर गांव पहुंची टीम ने ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराईं. स्वास्थ्य शिविर में 227 ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया. इस दौरान मलेरिया, सिकल सेल, हीमोग्लोबिन, मधुमेह और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों की जांच की गई. जरूरतमंद मरीजों को मौके पर ही उपचार और निशुल्क दवाइयां वितरित की गईं. शिविर में महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया गया. जांच के दौरान एक हाई रिस्क गर्भवती महिला को बेहतर उपचार और सुरक्षित प्रसव के लिए जिला अस्पताल रेफर किया गया.

हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से पीड़ित 12 मरीजों को आगे के इलाज के लिए उच्च स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार दूरस्थ बस्तर तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है. उन्होंने कहा कि ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ से ग्रामीणों को गांव के पास ही उपचार और जरूरी स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं. स्वास्थ्य विभाग की टीम ने ग्रामीणों को आयुष्मान भारत योजना, पोषण, स्वच्छता और सुरक्षित मातृत्व के प्रति भी जागरूक किया. अधिकारियों के अनुसार अभियान का उद्देश्य दूरस्थ अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के साथ ग्रामीणों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है.

प्रशासनिक पहुंच से बढ़ रहा लोगों को भरोसा

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले ऐसे गांवों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहद मुश्किल मानी जाती थी, लेकिन अब नियमित शिविरों और प्रशासनिक पहुंच से लोगों में भरोसा बढ़ रहा है. बस्तर के जिन इलाकों को कभी भय और पिछड़ेपन की पहचान माना जाता था. वहां अब विकास और जनसेवा की नई तस्वीर उभर रही है.

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गोविन्द सिंहSenior Sub Editor

गोविन्द सिंह जनवरी 2026 से देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान नेटवर्क 18 ग्रुप में बतौर Senior Sub Editor कार्यरत हैं, जहां वह मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ स्टेट टीम का हिस्सा हैं. किस्सागोई के अंदाज में खबरें पेश कर…और पढ़ें


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