नक्सलियों के चंगुल से पुलिस कर्मी को वापस लेकर आई पत्नी, मौत के साये में बीते 7 दिन Wife brought back to police personnel from clutches of Naxalites, last 7 days in the shadow of death | bijapur – News in Hindi

छत्‍तीसगढ़: नक्सलियों ने कर लिया था अगवा, पुलिस में काम न करने के वादे पर छूटा जवान

ग्रामीणों के सामने अपना पक्ष रखता पुलिस कर्मी.

Chhattisgarh: बीजापुर (Bijapur) में एक मेले से पुलिसकर्मी को अगवा कर लिया गया था. पत्‍नी के प्रयासों से वह छूट सका.

बीजापुर. छत्तीसगढ़ के बीजापुर (Bijapur) में एक पुलिसकर्मी की पत्नी ने पति को नक्सलियों (Naxalite) के चंगुल से छुड़ा लाईं. मंदिर दर्शन के लिए गए पुलिसकर्मी का नक्सलियों ने पिछले सप्ताह अपहरण कर लिया था. बीते 11 मई को नक्सली जनअदालत लगाकर जवान के जीवन का फैसला करने वाले थे. इसकी जानकारी जवान की पत्नी को मिली और वह किसी तरह उस गांव में पहुंची जहां नक्सलियों की जनअदालत लगने वाली थी. बताया जा रहा है कि ग्रामीणों के सकारात्मक और मानवीयतापूर्ण निर्णय के बाद पुलिसकर्मी को नक्सलियों ने छोड़ दिया. बताया जाता है कि जवान ने पुलिस में आगे काम न करने का आश्‍वासन दिया, तब जाकर उसे छोड़ गयाा और वह पत्‍नी संग वापस लौटा.

बीजापुर के एसपी कमललोचन कश्यप ने घटना की पुष्टि करते हुए न्यूज 18 को बताया कि पुलिसकर्मी सकुशल वापस आया है. किन परिस्थितियों में उसका अपहरण नक्सलियों ने किया था, उसकी जांच की जाएगी. पुलिस विभाग में इलेक्ट्रिशियन पद पर पदस्थ संतोष कट्टम का अपहरण नक्सलियों द्वारा किया गया था. इस घटना को कवरेज करने वाले बीजापुर के पत्रकार रंजन दास ने बताया कि बीते 11 मई को नक्सलियों द्वारा लगाई गई जनअदालत में लगभग एक से डेढ़ हजार ग्रामीण पहुंचे थे.

मंदिर दर्शन के दौरान अपहरण
बीजापुर के भोपालपट्नम में पदस्थ पुलिसकर्मी संतोष कट्टम मूलत: सुकमा के जगरूगुंडा का रहने वाला है. संतोष ने बताया कि बीते 4 मई को वह गोरना मंदिर में आयोजित मेले के दौरान दर्शन के लिए गया हुआ था, जहां से नक्सलियों ने उसका अपहरण कर लिया.‘मौत के साये में गुजरे 7 दिन’

संतोष ने बताया कि मंदिर दर्शन के बाद वह बाहर साथ आए मित्र के इंतजार में था. इसी बीच ग्रामीण वेशभूषा में मौजूद नक्सलियों को उस पर शक हुआ. वे उसे मेले से दूर लेकर गए. पूछताछ की और गाड़ी की तलाशी ली, जिसमें टी-शर्ट और आईकार्ड से उसकी पहचान हो गई. फिर नक्सलियों ने फौरन उसके हाथ बांध दिए. बस तब से लेकर रिहाई तक उसकी आंखों पर पट्टी ही बंधी हुई थी. पिछले सात दिनों तक उसने कितने गांवों को पार किया, कितनी पहाड़ियां चढ़ीं , कितने पेड़ों के नीचे सोया, उसकी कोई गिनती नहीं. रात के अंधेरे में एक गांव से दूसरे गांव नक्सली उसे अपने साथ लेकर चलते. खाने में चीड़ि‍यों का मांस मांस और सूखी मछली दी जाती थी. पूरे सात दिन वह कई गांव बदलता रहा, लेकिन किसी भी मकान या झोपड़ी में उसे ठहराया नहीं गया. पेड़ों के नीचे दिन और रात कटती, हाथ पीछे से बंधे होते और 24 घंटे हथियारबंद नक्सलियों का सख्त पहरा था.

इस तरह कब्जे से छूटा जवान
बीजापुर के पत्रकार रंजन दास बताते हैं कि पुलिसकर्मी संतोष कट्टम ने बताया कि लगातार सात दिनों तक अपने साथ जंगलों में घुमाने के बाद नक्सली बीते सोमवार को जनअदालत लगाकर उसका निर्णय करने वाले थे. रंजन कहते हैं कि पुलिसकर्मी की पत्नी सुनीता कट्टम को कहीं से सूचना मिली कि नक्सली उनके पति को बीहड़ में रखे हैं. इसके बाद वो किसी तरह वहां पहुंची. साथ में बीजापुर के कुछ पत्रकार भी गए. नक्सलियों की आयोजित जनअदालत में 2 घंटे तक संतोष के साथ सवाल जबाव किया गया, जिसके बाद जवान द्वारा जब यह आश्वासन दिया गया कि वह अब पुलिस की नौकरी नहीं करेगा और खेती बाड़ी कर जीवन यापन करेगा, उसके बाद उसे पत्नी सुनीता कट्टम और बेटी भावना कट्टम के समक्ष छोड़ा गया.

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First published: May 13, 2020, 10:19 AM IST




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