- मंदिर परिसर में 6 फुट की दूरी अनिवार्य
- एक साथ जमा नहीं होंगे जूते-चप्पल
मोदी सरकार ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन कर रखा है. हालांकि मोदी सरकार ने लॉकडाउन 5.0 में 8 जून से धार्मिक स्थलों, मॉल समेत अन्य सार्वजनिक स्थलों को खोलने की इजाजत दे दी है. अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने धार्मिक स्थलों के लिए एसओपी जारी किया है. अगर सभी लोगों ने सावधानी बरती, तो कोरोना वायरस को फैलने से रोकने में मदद मिलेगी.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि धार्मिक स्थलों में काफी संख्या में लोग जमा होते हैं. ऐसे में कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना और अन्य जरूरी मापदंड अपना बेहद जरूरी है. हालांकि अभी कंटेनमेंट जोन में धार्मिक स्थल नहीं खोले जाएंगे. फिलहाल कंटेनमेंट जोन से बाहर के धार्मिक स्थलों को ही खोलने की इजाजत होगी.
इसके साथ ही 65 साल से ज्यादा उम्र के लोगों, बीमारों, गर्भवती महिलाओं और 10 साल से कम उम्र के बच्चों के मंदिरों समेत सभी धार्मिक स्थलों में जाने पर मनाही है. इनको घर में रहने की सलाह दी गई है.
मंदिरों में क्या-क्या बदलेगा?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी एसओपी के मुताबिक मंदिरों समेत सभी धार्मिक स्थलों के प्रवेश द्वार पर सैनिटाइजर और थर्मल स्क्रीनिंग जरूरी होगी. ऐसी जगहों पर कम से कम 6 फुट की शारीरिक दूरी रखना आवश्यक होगा. मास्क लगाना और चेहरे को ढकना भी अनिवार्य होगा. साबुन से 40 से 60 सेकेंड तक और सैनिटाइजर से 20 सेकेंड तक हाथ धोने होंगे.
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एसओपी के मुताबिक खांसते और छींकते समय मुंह ढकना अनिवार्य होगा. मोबाइल पर अयोग्य सेतु ऐप डाउनलोड करना होगा. सार्वजनिक स्थल पर थूकने पर पूरी तरह से पाबंदी जारी रहेगी. साथ ही मंदिर की मूर्तियों और ग्रंथों समेत किसी भी चीज को छूने की इजाजत नहीं होगी.
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मंदिर समेत सभी धार्मिक स्थलों के परिसर को कई बार साफ किया जाएगा. इसके अलावा मंदिर में प्रवेश करने से पहले जूते-चप्पलों को अलग रखना होगा. आपको बता दें कि चीन के वुहान शहर से फैले कोरोना वायरस ने भारत समेत पूरी दुनिया में तबाही मचा रखी है. भारत में कोरोना वायरस के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं.
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