बाल – बच्चा होगे ते अपन मन के जा अउ दिन तारीख ला खच्चित लिखवा. कतको सरकारी काम मा मदद घलोक होथे. खच्चित लिखवाए ले जनगणना के पता चलथे.
- News18Hindi
- Last Updated:
October 26, 2020, 11:51 PM IST
कोटवारी किताब के लेख थाना तक जाथे. हप्ता मा , पन्दहरी मा नइ ते महिनावार जानकारी सब्बो गांव ले थाना तक पहुँचना जरूरी हे. कोटवार मेरन जनम – मरन के घलोक लेख मिलही. बाल – बच्चा होगे ते अपन मन के जा अउ दिन तारीख ला खच्चित लिखवा. कतको सरकारी काम मा मदद घलोक होथे. खच्चित लिखवाए ले जनगणना के पता चलथे. फेर कोनो मेर अन्धेर होवत होही तेला ते जान सकस न मे जान सकंव. हमला का करना हे केहे के सेती ताय कतको योजना के मार खवई.
सब्बो झन जानत हें नेम – धरम निभाना एला कोनो सिखोए , पढ़ोए बर नइ परय. देखताक के कई ठन बुता हा तइहा ले सरलग चले आवत हे. अबादी बाढ़त – बाढ़त अतका होगे के आंकड़ा घलोक रो डरही का तइसे लागथे. कोनो कोती जा भीड़ के ठिकाना नइये. अब तो चोर – चिहार के पता लगाए घलोक कठिन होए लागिन. नान – नान रोजी – रोजगार के साधन धरे गांव , गली , शहर मा किंजरइया कतकोन मिल जाहीं. कोने न कोन. रोजीना आना – जाना करके जान पहिचान बनाना उंखर काम होगे हे. अइसने करत – करत एक दिन बड़का बुता करके अपन सर्राटा मार देथें तें कन्झावत रा. बिगड़ने वाला के बिगाड़ होगे , हंसइया के का कर लेबे.
अब नवा जमाना आगे हावय. भुंइया के सौदा अवने – पवने मा होवत हे. लालच हा उजागर नइ होए पाए हे. आज तलक के ललचहा मन के सेती कतको जगा बेचावत हे. पहली गांव के अबादी के हिसाब ले पंचायत डाहर ले परिवारिक कारण जान के अबादी जमीन के बंटवारा होवय. गांव – गांव मा नवा बस्ती बसाए जावत रिहिस. अब तो चूना मार दे तहां तोर होगे. एहा बने बात नोहे अइसन नइ होना चाही. सड़क के तीरे – तीर इहां ले उहां तक जाके देख ले. कतका खरीदी बिक्री के जोड़ घटाना चलथे. फुट हिसाब मा सौदा होवत हे अउ सब्बो किसम के बेवस्था तक के ठेका ला संघार के नवा कालोनी उजागर होवत हे. कालोनी के जिनगी ला जेन जियत हे तेने जानत होही. पास – परोस मा कोन रइथे जानकारी नइ राहय. कोनो नइ देना चाहंय अपन जानकारी. चोरहा – लबरा कस जिनगी घलोक आने वाला दिन बर अलहन बर नेवता देवत हे तइसे लागथे. सब्बो पारा मोहल्ला मा कइसे छोटे – बड़े सब्बो मिलके उछाह मंगल मनावन अब सपना हो जाही तइसे लागथे.
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नवा जमाना के पढ़ई – लिखई, रहन-सहन एकदम अलगेच होगे हे. हिनमान करइया के नाक मुंह ला देखबे ततके मा जान डारबे. चरचकिया गाड़ी के सवाद लेवत अपने खोल मा समाए रहिथें. पारा – परोसी के नियाव – सियाव ले कोनो ला लेना देना नइ राहय. हर चीज के कीमत आंकने वाला समाज काली कहां जाही तेखर चिंता करइया कोनो नइ दीखत हें. चलनी के चाल ला कोन नइ जानय. कतको छेदा राहय ओला फरक नइ परय ढुरु – ढुरु ला अलगियाच के मानही. आजकल सब्बो काम मा फोन – फान के महत्तम बाढ़ गेहे. फोन – फान करत ले , मोटर गाड़ी के आवत ले कतको झन के परान छूट जथे. लेगत – लेगत ए दुनिया छोड़ दिस अइसनहो किस्सा सुनइया इहां मिल जाही.
कांही कर ले फेर हमला लहुट के आना परही अउ अपन पुरखा के चेताए , चतवारे रद्दा मा रेंगेच ला परही. कोनो मेरन थीरबांह लेना हे ते अपन जिनगी ला नाप नुपा के देखव कहूं हमन अतलंग तो नइ करत हन.

