वो चार बातें जो बताती हैं कि चीन की राह पर चल रहा नेपाल – India nepal border dispute map controversy firing on indian citizens

  • भारत व नेपाल के बीच नक्शा विवाद जारी
  • नेपाल के नक्शे में भारतीय जमीन शामिल

भारत और चीन के बीच हुई हिंसक झड़प में देश के 20 जांबाज शहीद हुए हैं. वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर दोनों देशों में तनाव बना हुआ है. भारतीय फौज चीन की एक-एक चाल पर करीबी निगाह बनाए हुए है. दूसरी ओर, एलएएसी पर जारी तनाव के इस नाजुक मोड़ पर नेपाल भी कई दिनों से सीमा मुद्दे को हवा दे रहा है. मामला लिपुलेख और कालापानी के इलाके से जुड़ा है जो भारत और नेपाल के बीच स्थित है. इस घटना के बाद दोनों देशों में नक्शा विवाद पैदा हो गया है जिसे परस्पर बातचीत से सुलझाने की कोशिशें चल रही हैं.

नेपाल के साथ जारी विवाद के तौर-तरीके को देखें तो इसमें चीन जैसी घटनाओं की रूप-रेखा भी देखी जा सकती है. जैसे नेपाल बॉर्डर पर हालिया गोलीबारी, भारत के साथ नक्शे का विवाद, भारत से जुड़ी सीमा (पोस्ट) से छेड़खानी और नेपाल की ओर से भारत विरोधी पक्ष को लगातार हवा देना. ये पांच घटनाएं ऐसी हैं जो भारत को किसी बड़े तनाव के लिए आगाह करती हैं.

बॉर्डर पर गोलीबारी

एक ओर नेपाल भारत की जमीन को अपने नक्शे में शामिल कर रहा है तो दूसरी ओर बॉर्डर पर उसके पुलिसकर्मियों में भारतीय लोगों के खिलाफ रोष देखा जा रहा है. अभी हाल में एक ऐसी ही खबर बिहार के सीतामढ़ी जिले से आई जहां नेपाल की सीमा लगती है. यहां सीमा पर नेपाली पुलिस की गोलीबारी में एक भारतीय की मौत हो गई.

सीतामढ़ी जिले के सोनबरसा थाना क्षेत्र में जानकी नगर बॉर्डर पर नेपाल की पुलिस ने अचानक अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी जिसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और 4 घायल हो गए. कहा गया कि नेपाल पुलिस की ओर से 17 से 18 राउंड गोली दागी गईं. नेपाली पुलिस ने अपनी सफाई में बताया कि पुलिस का हथियार छीन कर भाग रहे लोगों पर गोली चलाई गई, लेकिन स्थानीय लोगों ने बॉर्डर पार जाने को लेकर विवाद में गोली चलाने की बात बताई.

नक्शा विवाद

नेपाल और भारत के रिश्ते न सिर्फ सत्ता और सरकारें, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक आधार पर भी बेहद घनिष्ठ रहे हैं. जिस नेपाल से भारत का रोटी-बेटी का नाता रहा है, वह मित्र देश भी अब आंखें दिखा रहा है. यह परिवर्तन तब से हुआ है, जब से नेपाल की सत्ता चीन की तरफ झुकाव रखने वाली कम्युनिस्ट पार्टी के हाथ में गई है. नेपाल ने अपने संविधान में संशोधन कर नया नक्शा जारी किया है, जिसमें भारत के तीन स्थानों लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को अपना भाग बताया है.

सरकार के सामने पुराने मित्र को साधे रखने के साथ ही वहां चीन के बढ़ते प्रभाव की बड़ी चुनौती भी है. नेपाली संसद के ऊपरी सदन में बुधवार को 3 बजे नक्शा विवाद पर चर्चा होगी और संविधान संशोधन विधेयक पारित किया जाएगा. बता दें, नेपाल ने प्रतिनिधिसभा में एक नए नक्शे को मंजूरी दी है, जिसमें भारतीय जमीन को शामिल किया गया है. इसके बाद दोनों देशों में कड़वाहट सामने आई है.

पोस्ट से छेड़खानी

नेपाल कई मोर्चे पर भारत के साथ विवाद को हवा दे रहा है. इसमें एक वर्षों पुराने वे पोस्ट (चौकियां) हैं जिन पर खास समझौते के तहत दोनों देशों के बीच सहमति है. दोनों देश इसे बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं लेकिन हाल में इन चौकियों के भूगोल के साथ भी छेड़खानी की गई है. भारत-नेपाल सीमा की गौरीफंटा पर तैनात 39वीं बटालियन के एसएसबी कमांडेंट मुन्ना सिंह की लखीमपुर खीरी जिले के डीएम शैलेंद्र कुमार सिंह को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि भारत-नेपाल सीमा पर लगे कई भारतीय पिलर्स गायब हैं. इसके बाद डीएम ने सतर्कता दिखाते हुए भारत नेपाल सीमा पर लगी सभी सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है और भारतीय पिलर्स की सुरक्षा किए जाने के आदेश जारी किए हैं. नेपाल की ओर से भारत के तीन इलाकों को अपना क्षेत्र बताने के बाद भारत-नेपाल के बीच रिश्ते तनावपूर्ण हो गए हैं.

भारत विरोधी पक्ष को हवा देना

नेपाल ने कई भारतीय क्षेत्रों पर दावा करते हुए एकतरफा नक्शा प्रस्ताव पास करवा लिया है. इसके बाद ये नक्शा नेपाल के संविधान का अंग बन गया है. भारत सरकार को सूचना मिली है कि नेपाल इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा सकता है. नेपाल सरकार की तरफ से भारत के साथ ‌हुई कई संधि समझौते को‌ एकतरफा समाप्त करने की घोषणा भी की जा सकती है. नेपाल की तरफ से नए संधि समझौते करने के लिए बार-बार इपीजी रिपोर्ट स्वीकार कर उस पर अमल करने की मांग होती रही है. लेकिन भारत ने अब तय कर लिया है कि किसी भी हालत में इपीजी की रिपोर्ट स्वीकार नहीं की जाएगी.

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