
मेडिकल में हिन्दी को दिलाएंगे ख्याति
अब हिन्दी में करें एम.बी.बी.एस. की पढ़ाई
भोपाल, ब्यूरो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि शिक्षा का माध्यम मातृ-भाषा होना चाहिए। विद्यार्थी अंग्रेजी अवश्य सीखें, पर शिक्षा अंग्रेजी में ही संभव है, इस विचार से मुक्ति जरूरी है। हिन्दी में पढ़ाई के लिए देश में आत्म-विश्वास पैदा करना आवश्यक है। यह अंग्रेजी न जानने वाले बच्चों की जिन्दगी बदलने का अभियान है। ऐसे ओजस्वी विचार मध्यप्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान के हैं।
यह विचार वर्तमान समय में सौ फीसदी सटीक बैठते हैं। क्योंकि जब भारतमाता के माथे की बिंदी की बात होती है तो हिन्दी सामने आती है। हिंदी महज एक भाषा नहीं, भारत की पहचान है। हमारे जीवन मूल्यों, संस्कृति एवं संस्कारों की सच्ची संवाहक, संप्रेषक और परिचायक भी है। बहुत सरल, सहज और सुगम भाषा है। यह विश्व में तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है। समाज को समृद्ध बनाने वाली ऐसी हिन्दी अब मध्यप्रदेश में छटा बिखेेरने को तैयार है। प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों में एम.बी.बी.एस की पढ़ाई हिन्दी में भी शुरू होगी। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रावधानों को लागू करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य बन जाएगा। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 16 अक्टूबर को देश में पहली बार हिन्दी में मेडिकल की पढ़ाई का भोपाल में शुभारंभ करेंगे। भोपाल के लाल परेड ग्राउण्ड पर एम.बी.बी.एस. प्रथम वर्ष की हिन्दी पुस्तकों का विमोचन होगा। हिन्दी के प्रति हीन-भावना और असमर्थता की धारणा बदलने के लिए शिवराज सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम की चहुंओर चर्चा हो रही है।

