सीता की रसोई और राम-लक्ष्मण गुफाएं बनेंगे पर्यटन-तीर्थ, भूपेश सरकार ने तैयार की योजना | raipur – News in Hindi

छत्तीसगढ़ सरकार ने राम से संबंधित 75 स्थानों का चयन किया है. (फाइल फोटो)

भगवान राम (Lord Ram) के वनवास काल से संबंधित स्थानों का पर्यटन-तीर्थ के रूप में विकास करने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) ने महत्वाकांक्षी परियोजना का आगाज किया है. इसके लिए राम वन गमन परिपथ तैयार किया जा रहा है. शासन ने राम से संबंधित 75 स्थानों का चयन किया है.

दिल्ली. छ्त्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में भगवान राम (Lord Ram) के वनवास काल से संबंधित जिन स्थानों को पर्यटन-तीर्थ के रूप में विकसित किया जा रहा है, उनमें कोरिया जिले का सीतामढी-हरचौका तथा सरगुजा का रामगढ़ भी शामिल है. इनमें से रामगढ़ की प्रसिद्धि विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला के लिए भी है. महाकवि कालिदास ने अपनी कालजयी कृति मेघदूतम् की रचना यहीं पर की थी. वनवास के दौरान भगवान राम ने कोरिया (Koriya) जिले से ही छत्तीसगढ़ में प्रवेश किया था. भरतपुर तहसील के जनकपुर में स्थित सीतामढ़ी-हरचौका को उनका पहला पड़ान माना जाता है. मवाई नदी के किनारे स्थित सीतामढ़ी-हरचौका की गुफा में 17 कक्ष हैं. इसे सीता की रसोई के नाम से भी जाना जाता है. वहां एक शिलाखंड हैं जिसे लोग भगवान राम का पद-चिन्ह मानते हैं.

मवाई नदी तट पर स्थित गुफा को काट कर 17 कक्ष बनाए गए हैं, जिनमें शिवलिंग स्थापित हैं.  इसी स्थान को हरचौका (रसोई) के नाम से जाना जाता है. भगवान राम हरचौका से रापा नदी के तट पर स्थित सीतामढ़ी-घाघरा पहुंचे थे. यहां करीब 20 फीट ऊपर 4 कक्षों वाली गुफा है, जिसके बीच में शिवलिंग स्थापित है. आगे की यात्रा में वे घाघरा से निकलकर कोटाडोला होते हुए सरगुजा जिले की रामगढ़ पहाड़ी पहुंचे थे. यह अम्बिकापुर- बिलासपुर मार्ग पर स्थित है. इसे रामगिरि भी कहा जाता है. महाकवि कालिदास के मेघदूत में इसी स्थान के दृश्यों को बताया गया है. माना जाता है कि वनवास के दौरान श्री राम ने पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ यहां कुछ दिन बिताये थे, इसीलिए वहां स्थित गुफाएं  उन्हीं के नाम से जानी जाती हैं. राम के तापस्वी वेश के कारण एक का नाम जोगीमारा, दूसरे का सीता बेंगरा एवं एक अन्य का लक्ष्मण गुफा पड़ गया.

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सरकार ने बनाई योजनाभगवान राम के वनवास काल से संबंधित स्थानों का पर्यटन-तीर्थ के रूप में विकास करने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने महत्वाकांक्षी परियोजना का आगाज किया है. इसके लिए राम वन गमन परिपथ तैयार किया जा रहा है. शासन ने राम से संबंधित 75 स्थानों का चयन किया है. पहले चरण में इनमें से 9 स्थानों का सौंदर्यीकरण और विकास किया जा रहा है. इसके लिए 137 करोड़ 45 लाख रुपए की कार्ययोजना तैयार की गई है. इस परिपथ में अच्छी सड़कों समेत विभिन्न तरह की नागरिक सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी.




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