स्वर्ग देखकर वापस लौट आए स्वामी पुरुषोत्तमानंद, 3 दिन समाधि में रहने वाले बाबा से मिलिए…

भोपाल, ब्यूरो। क्या आपने कभी स्वर्ग देखा है? क्या आपने दुनिया का रहस्य समझा है? अगर नहीं तो हमारी खबर को पूरे ध्यान से पढ़िए। खबर भोपाल के तात्याटोपे नगर स्थित भद्रकाली विजयासन मंदिर से आई है। साउथ टीटी नगर स्थित विजयासन दरबार में स्वामी पुरुषोत्तमानंद 1 अक्टूबर की सुबह 10 बजे 7 फीट गहरे गड‌्ढे में उतरे थें वे वहां तपस्या करने उतरे थे। उन्होंने 3 अक्टूबर की सुबह 10 बजे बाहर आने की बात कही थी। और ऐसा ही हुआ। 3 अक्टूबर सोमवार सुबह 10 बजे तक भीड़ ही भीड़ थी। पुलिस भी तैनात थी। सुबह भक्तों ने तपस्या स्थल पर पूजा शुरू की। बाबा की पत्नी इस दौरान आरती की थाली लिए खड़ी रहीं। सबसे पहले गड्‌ढे के ऊपर बिछाए गए लाल रंग के कपड़े को हटाया गया। इस कपड़े पर मिट्‌टी डाली गई थी। कपड़ा हटाते ही पटिए नजर आने लगे। गड्‌ढे में से 12 पटियों को हटाया गया। 4 पटिए के हटते ही महाराज की पहली झलक दिखने लगी। महाराज ध्यान मुद्रा में बैठे हुए दिख रहे थे। भक्तों ने उन पर पुष्प वर्षा शुरू कर दी। चहुंओर जयकारे लगने लगे। महाराज पूरे-होंशो हवास में थे, उन्होंने जनता का बैठे-बैठे हाथ जोड़कर अभिवादन किया। इस दौरान लगातार उनके ऊपर फूल बरसाए गए। जल छिड़का गया। पत्नी चारू सोनी ने उनकी आरती उतारी। वे कुछ देर तक तपस्या स्थल पर ही खड़े रहे। भक्तों को आशीर्वाद दिया। बाहर आते ही महाराज सबसे पहले विजयासन माता के दरबार में गए। यहां पर पूजा की।

महाराज ने मीडिया से चर्चा में बताया कि समाधि के समय मां भगवती की कृपा से असीम शक्तियां मेरे शरीर में प्रवेश कर रही थीं। हृदय, मेरे मस्तिष्क पर सिर्फ माताजी का प्रभाव था। अंत में एक-एक कर जब सारी शक्तियां मुझमें आ गईं, तो माता स्वयं सिंह के रथ पर प्रकट हुईं। मुझे बुलाते हुए कहा- हे भक्त! तू मेरे साथ चल, तूने मेरे वचन का पालन किया है। तुझे स्वर्ग लोक की यात्रा कराती हूं। बाबा ने बताया कि इसके बाद वे स्वर्ग की यात्रा करने चले गए। महाराज की पत्नी मुख्य सेविका चारू सोनी ने कहा कि बाबाजी ने लोक कल्याण की कामना के लिए समाधि ली थी। समाधि लेने से पहले उन्होंने आंकड़ा गणेश की पूजा की। बाबा ने अपने शिष्यों से कहा कि भू-समाधि के लिए उन्हें मां भगवती ने ही प्रेरित किया है। महाराज के करीबियों ने दावा किया है कि वे इससे पहले महेश्वर में 24 घंटे की जल समाधि ले चुके हैं। अग्नि स्नान भी कर चुके हैं। महाराज के शिष्य रूपनारायण शास्त्री ने बताया कि समाधि में बैठने के लिए बाबा ने 10 दिन खाना त्याग रखा। 3 दिन से पानी भी नहीं पीया। खाना-पानी छोड़ने की वजह यह है कि इससे शरीर स्वस्थ रहता है। समाधि के दौरान कोई परेशानी नहीं होती।

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