हाथी की हत्या करने पर IPC की इस धारा के तहत मिलेगी सजा, लगेगा ये एक्ट – kerala malappuram pregnant hathini explosion death ipc section 429 wildlife act action crime

  • मलप्पुरम की घटना से देश में उबाल
  • हथिनी की मौत पर लोगों ने जताया दुख
  • आरोपी के खिलाफ इन धाराओं में होती है कार्रवाई

केरल के मलप्पुरम में गर्भवती हथिनी की दर्दनाक मौत से पूरे देश के लोगों में गुस्सा है. उस बेजुबान को पटाखों से भरा अनानास खिलाकर मार दिया गया. सोशल मीडिया पर भी इस घटना के विरोध में लोगों का गुस्सा साफ देखा जा सकता है. हर कोई इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा दिए जाने की मांग कर रहा है. लेकिन अभी तक अनानास को बम बनाने वाले लोगों का सुराग नहीं है. पुलिस मामले की छानबीन कर रही है.

इस तरह की वारदातों को अंजाम देने वालों के खिलाफ भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम (Indian Wildlife Protection Act) के तहत कार्रवाई होती है. साथ ही हाथी और समकक्ष जानवरों की हत्या करने वाले आरोपियों पर इंडियन पैनल कोड की धारा 429 के तहत कार्रवाई की जाती है. आपको बताते हैं कि क्या है हाथी की हत्या के मामले के प्रावधान.

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भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियमवन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत वन्यजीवों की हत्या और शिकार के मामलों में कड़ी सजा का प्रावधान है. इस अधिनियम की अनुसूची और अनु. 2 के तहत अवैध शिकार, अभयारण्य या राष्ट्रीय उद्यान को क्षति पहुंचाने वाले दोषियों को कम से कम 3 साल की सजा दिए जाने का प्रावधान है. आवश्यकता पड़ने पर इस सजा को 7 साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है. साथी इसमें दोषी पर 10 रुपये का जुर्माना भी किया सकता है.

क्या होती है धारा 429

भारतीय दंड संहिता यानी (IPC) की धारा 429 उन मामलों में लागू होती है, जिनमें वन्यजीवों हाथी, ऊंट, घोड़े और खच्चर आदि की हत्या करना, या उन्हें मारने के मकसद से जहर देना या विकलांग बना देना शामिल है. फिर चाहे उस वन्यजीव की कीमत या महत्ता कितनी भी हो. ऐसे मामलों में कानून ने कड़ी सजा का प्रावधान कर रखा है.

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सजा व आर्थिक दंड

हाथी या उसके समकक्ष वन्यजीव की हत्या करने के मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के साथ-साथ आईपीसी की धारा 429 के तहत मुकदमा दर्ज होता है. दोषी पाए जाने पर आरोपी को किसी भी एक तय समय के लिए कारावास की सजा हो सकती है. बाद में इस सजा को पांच वर्ष तक बढ़ाया भी जा सकता है. यही नहीं दोषी पर आर्थिक दण्ड भी लगाया जा सकता है. या दोषी को दोनों ही सजा मिल सकती हैं.

कानून के जानकारों के मुताबिक यह इस धारा के तहत आने वाले अपराध जमानती और संज्ञेय होते हैं. ऐसे मामलों की सुनवाई प्रथम श्रेणी के न्यायधीश करते हैं. ऐसे मामलों में दोषी और जानवर के स्वामी के बीच समझौता भी किया जा सकता है.

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