22 जून को होगी रूस-भारत-चीन त्रिपक्षीय समूह की बैठक – Russia india china trilateral meet to take place on 22 june 2020

  • रूसी विदेश मंत्री बोले- तनाव कम करने के लिए चर्चा कर रहे दोनों देश
  • त्रिपक्षीय समूह की बैठक में नहीं होती है द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चाः रूस

लद्दाख की गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के बीच तनाव गहराया हुआ है. इस बीच रूस ने ऐलान किया कि 22 जून को रूस-भारत-चीन (RIC) त्रिपक्षीय समूह की बैठक होगी. रूसी विदेश मंत्री सेरगेई लावरोव ने आसियान (ASEAN) के विदेश मंत्रियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए एक विशेष बैठक के बाद रूस-भारत-चीन त्रिपक्षीय समूह की बैठक की घोषणा की.

रूस ने भारत और चीन द्वारा सीमा पर तनाव कम करने के लिए एक-दूसरे से संपर्क करने का भी स्वागत किया. रूसी समाचार एजेंसी तास के एक सवाल पर सेरगेई लावरोव ने कहा, ‘यह पहले ही घोषित किया जा चुका है कि भारत और चीन के सैन्य प्रतिनिधियों ने संपर्क किया है. वो सीमा पर उपजे तनाव और उसको कम करने को लेकर चर्चा कर रहे हैं. हम इसका स्वागत करते हैं.’

22 जून को होने वाली त्रिपक्षीय समूह की बैठक में भारत-चीन सीमा विवाद के मुद्दे पर चर्चा की संभावना पर रूसी विदेश मंत्री सेरगेई लावरोव ने कहा कि इस बैठक में जिन विषयों पर चर्चा की जानी हैं, उन पर तीनों देश पहले ही सहमति दे चुके हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि रूस-भारत-चीन त्रिपक्षीय समूह की बैठक में द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा नहीं होती है.

आपको बता दें कि 15 जून की रात को गलवान घाटी में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प हुई थी, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे. सूत्रों के मुताबिक इस हिंसक झड़प में चीन को भी भारी नुकसान हुआ है और उसके कमांडर समेत 40 जवान मारे गए हैं.

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वहीं, बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन सीमा पर शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी. इस दौरान उन्होंने कहा कि चीन सीमा पर जवानों की शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हमें अपने जवानों पर गर्व करना चाहिए, वे मारते-मारते मरे हैं. पीएम मोदी ने कहा कि मैं देश को भरोसा देता हूं कि जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा.

पीएम मोदी ने कहा, ‘हमने हमेशा से अपने पड़ोसियों के साथ मिलकर काम किया है. हमेशा उनके विकास और कल्याण की कामना की है. जहां कहीं मतभेद भी रहे हैं, हमने हमेशा ये प्रयास किया है कि मतभेद विवाद न बने. हम कभी किसी को भी उकसाते नहीं हैं. लेकिन अपने देश की अखंडता और संप्रभुता के साथ समझौता भी नहीं करते. जब भी समय आया है हमने देश की अखंडता और संप्रभुता की रक्षा करने के लिए अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया है, अपनी क्षमताओं को साबित किया है.’

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