वन विभाग पेड़ का खास ख्याल रखता है.
दरअसल तेंदू के पेड़ कभी इस तरह से सीधे और इतने मोटे नहीं होते हैं. लेकिन वह विभाग ने पाया कि ये पेड़ उनसे अलग है. इसे देखते हुए इसे संरक्षित श्रेणी में रखा गया है और इसे ब्रह्मतेन्दु का नाम दिया गया है.
वन विभाग रखता है विशेष ध्यान
ये ब्रह्मतेन्दु धमतरी वन मंडल के नगरी रेंज वाले गांव डोंगरदुला के जंगल में है. इस बेहद घने जंगल में असंख्य बड़े और ऊंचे पेड़ हैं लेकिन इन सब के बीच ये ब्रह्मतेंदू अलग से नजर आ जाता है. वन विभाग ने इस पेड़ के पास एक बोर्ड भी लगवाया हुआ है, जिसमें इसकी उम्र, ऊंचाई, गोलाई सहित इसका जीपीएस लोकेशन भी दर्ज है.
आम तौर पर तेंदू के पेड़ 15 साल की उम्र में ही कटवा दिए जाते हैं, लेकिन इस पेड़ पर कुल्हाड़ी चलाना प्रतिबंधित है. एक विशेष टीम रोजाना आकर इसे देखती है और खास ख्याल रखती है. नगरी रेंज के डिप्टी रेंजर पीआर साहू ने बताया कि गर्मी में जब आग लगने की घटनाएं ज्यादा होती है तब भी हमारा स्टाफ इस ब्रह्मतेन्दु की हर तरह से सुरक्षित रखने में जुटा रहता है. डिप्टी रेंजर ने ये भी बताया कि ये पेड़ 1000 साल तक जीवित रहता है और जब तक ये प्राकृतिक रूप से स्वस्थ रहेगा. इसका इसी तरह संरक्षण किया जाएगा.प्रकृति की अनमोल विरासत है ब्रम्हतेंदू
पर्यावरण का संरक्षण बिना जंगल को बचाए नहीं हो सकता और ये 230 साल पुराना ब्रम्हतेंदू हमें प्रकृति को, पर्यावरण को, पेड़ों को बचाने के लिए प्रेरणा देता है. वन विभाग चाहता है कि सभी लोग जंगल में आकर इसे देखें और इसके बारे में जानें और जंगलों की कीमत समझें.
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First published: May 18, 2020, 2:34 PM IST


