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Summer Camp: जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा स्थित लायंस डीएवी पब्लिक स्कूल में चल रहे समर कैंप का मुख्य उद्देश्य बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और व्यावहारिक कौशल का विकास करना है. परीक्षा के बाद बच्चों के खाली समय को रचनात्मक गतिविधियों में बदलने के लिए स्कूल प्रबंधन द्वारा यह विशेष पहल की गई है.
Summer Camp For Childrens: जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा स्थित लायंस डीएवी पब्लिक स्कूल में इन दिनों दस दिवसीय समर कैंप का आयोजन किया जा रहा है. इस समर कैंप का मुख्य उद्देश्य बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और व्यावहारिक कौशल का विकास करना है. परीक्षा के बाद बच्चों के खाली समय को रचनात्मक गतिविधियों में बदलने के लिए स्कूल प्रबंधन द्वारा यह विशेष पहल की गई है.
समर कैंप के दौरान विद्यार्थियों को उनकी रुचि के अनुसार विभिन्न गतिविधियों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है, इसमें इंग्लिश स्पीकिंग, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट, डांस, ताइक्वांडो, आर्ट एंड क्राफ्ट, म्यूजिक, बास्केटबॉल और कुकिंग जैसी कई रोचक और उपयोगी गतिविधियां शामिल हैं. इन गतिविधियों के माध्यम से बच्चों को न केवल नई चीजें सीखने का अवसर मिल रहा है, बल्कि उनमें आत्मविश्वास और टीमवर्क की भावना भी विकसित हो रही है. इस समर कैंप की खास बात यह रही कि बच्चों को पारंपरिक कला से जोड़ने के लिए पॉटरी यानी मिट्टी के बर्तन बनाने की कला भी सिखाई गई. स्थानीय कुम्हार कृष्ण कुमार के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने गुल्लक, दीये, मटके और अन्य उपयोगी बर्तन बनाना सीखा. बच्चों ने बड़े उत्साह के साथ मिट्टी को आकार देकर अपनी रचनात्मकता का प्रदर्शन किया. इस गतिविधि ने बच्चों की एकाग्रता और सृजनात्मक को बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें भारतीय परंपराओं और स्वरोजगार के अवसरों से भी परिचित कराया.
मिट्टी के बर्तनों का उपयोग
स्कूल की छात्रा उन्नति सिंह चंदेल ने बताया कि आज के समय में लोग प्लास्टिक और कृत्रिम चीजों के पीछे भाग रहे हैं, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है. ऐसे में मिट्टी के बर्तनों का उपयोग पर्यावरण के लिए बेहतर है. उन्होंने कहा कि इस पॉटरी कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने दीये, गुल्लक और मटके बनाना सीखा है और यह भी समझा है कि यदि मिट्टी से बनी वस्तुएं टूट भी जाएं, तो उन्हें जैविक खाद के रूप में उपयोग किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता. वहीं, पॉटरी सिखाने आए कुम्हार कृष्ण कुमार ने बताया कि वे बरगवां गांव से आते हैं और पिछले दो वर्षों से स्कूल के निमंत्रण पर बच्चों को मिट्टी के बर्तन बनाने की कला सिखा रहे हैं, उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से बच्चों में पारंपरिक कला के प्रति रुचि बढ़ती है और इससे कुम्हारों की आजीविका को भी प्रोत्साहन मिलता है.
स्कूल के प्राचार्य सुनील श्रीवास्तव ने बताया कि विद्यार्थियों की परीक्षाएं समाप्त होने के बाद उनके खाली समय का सदुपयोग करने के लिए दो सप्ताह की हॉबी क्लास आयोजित की गई है. इसमें आत्मरक्षा, ड्राइंग, गायन, नृत्य और खेल जैसी गतिविधियों के साथ बच्चों को ग्रामीण परिवेश से जोड़ने के लिए मिट्टी के बर्तन बनाने की कला भी सिखाई गई. उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां बच्चों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…और पढ़ें
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