राजगढ़,,,आपरेशन मनी ट्रेप के तहत राजगढ़ पुलिस की बड़ी कार्यवाही*पैसे दोगुने करने का झांसा देकर ₹2 करोड़ की धोखाधड़ी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह का राजगढ़ पुलिस ने किया पर्दाफाश*₹1.73 करोड़ नगद, 04 लक्जरी वाहन एवं 19 एंड्रॉयड मोबाइल सहित कुल 2,92,91,000 रुपए का मशरूका जप्त* 24.07.2026 को ब्यावरा निवासी फरियादी देवेन्द्र पालीवाल, द्वारा थाना ब्यावरा शहर में रिपोर्ट की गई कि प्रफुल्ल गजभिये ने स्वयं को बड़ी कम्पनी से जुड़े लोगों का परिचित बताते हुए निवेश की रकम दोगुनी करने का लालच दिया। उसके द्वारा अन्य आरोपियों से फरियादी की मुलाकात कराई गई तथा फर्जी ई-मेल एवं दस्तावेज दिखाकर विश्वास में लिया गया।
आरोपियों द्वारा फरियादी को ₹2 करोड़ निवेश करने पर अधिक राशि वापस मिलने का झांसा दिया गया। दिनांक 22.07.2026 को भोपाल में आरोपियों द्वारा फरियादी से ₹2 करोड़ नगद प्राप्त कर उसे हवाला/आंगड़िया के माध्यम से भेजने की बात कही गई तथा फर्जी भुगतान संदेश दिखाकर उसे भ्रमित किया गया। राशि वापस प्राप्त नहीं होने पर फरियादी को अपने साथ हुई धोखाधड़ी का पता चला। फरियादी दो दिनों तक आरोपी गणों की तलाश भोपाल में करता रहा कोई जानकारी नहीं मिलने पर थाना ब्यावरा पुलिस को सूचित किया गया ।
ब्यावरा पुलिस द्वारा तत्परता दिखाते हुए अपराध पंजीकृत किया गया।प्रथम दृष्टया आरोपियों द्वारा आपराधिक षड्यंत्रपूर्वक धोखाधड़ी कर राशि हड़पना पाए जाने पर थाना ब्यावरा शहर में 24/07/26 को मामला दर्ज कर विवेचना में लिया।प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक द्वारा आरोपियों की गिरफ्तारी एवं ठगी की राशि की बरामदगी हेतु 10 विशेष टीमों का गठन किया जिसमें लगभग 50 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल रहे। आरोपियों के मूवमेंट एवं आपसी कनेक्शन की कड़ियां जोड़ने के लिए अलग-अलग राज्यों में करीब 3,000 से अधिक CCTV फुटेज खंगाले गए। पुलिस टीमों ने लगभग 30,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए करीब 35 दिनों तक लगातार कार्रवाई कर, आरोपियों की तलाश में महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान, केरल, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा सहित 10 राज्यों में लगातार दबिश दी गई, और विभिन्न राज्यों से 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया।इस गिरोह की कार्यप्रणाली कई स्तरों में बँटी हुई थी।
पहला स्तर था— मालदार पर जरूरतमंद पीड़ित को चिन्हित करना।दूसरा स्तर था—परिचय कराना और पीड़ित का विश्वास जीतना। इसके लिए बड़ी कंपनी का नाम, महँगी गाड़ियाँ, होटल में बैठक और व्यवस्थित दस्तावेजों का सहारा लिया गया।तीसरा स्तर था—फर्जी ई-मेल, स्वीकृति-पत्र और भुगतान संदेश दिखाकर निवेश को वास्तविक सिद्ध करना।चौथा स्तर था—पीड़ित से अधिकतम नकद राशि प्राप्त करना, ताकि बैंकिंग माध्यम में तत्काल कोई रिकॉर्ड न बने।पाँचवाँ स्तर था—नकद राशि को हवाला अथवा आंगड़िया नेटवर्क के माध्यम से अलग-अलग व्यक्तियों और शहरों तक पहुँचाना।
अंतिम स्तर पर गिरोह के सदस्य राशि को आपस में बाँटकर अपने ठिकाने, मोबाइल नंबर और शहर बदल देते थे।विशेष बात यह है कि हर लिंक पर आरोपी अपना नाम छुपा कर ट्रेड नाम रखते हैं एवं एक व्यक्ति अपने से ऊपर की लिंक और नीचे की लिंक से ही जुड़ा है द्वितीय लिंक के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं होती हैजांच में सामने आया कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से फरियादी को कंपनी में निवेश के नाम पर विश्वास में लेकर ₹2 करोड़ की राशि देने के लिए तैयार किया। माधव असोरे, जो कंपनी कर्मचारी के रूप में कार्य कर रहा था, तथा सुजीत टेम्बेकर एवं साहिल नीसवाडे ने फरियादी की तलाश एवं पहचान कर उसे गिरोह के संपर्क में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।इसके बाद प्रफुल्ल गजभिये एवं सचित कामले ने कंपनी के एजेंट के रूप में, दिनेश वीरानी ने कंपनी के चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में तथा वासुदेव गाडेकर ने कंपनी के डायरेक्टर के रूप में स्वयं को प्रस्तुत कर फरियादी से मुलाकात की।
इन आरोपियों ने कंपनी एवं निवेश योजना को वास्तविक एवं विश्वसनीय बताते हुए फरियादी का विश्वास हासिल किया तथा उसे ₹2 करोड़ की राशि देने के लिए तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।फरियादी को विश्वास में लेने के लिए भोपाल एवं ब्यावरा स्थित होटल प्रेसिडेंट एवं होटल रेडिएंट में आरोपियों द्वारा मुलाकात एवं बातचीत की गई। इन बैठकों में कंपनी, निवेश योजना एवं राशि के संबंध में चर्चा कर फरियादी को निवेश के लिए आश्वस्त किया गया।इसके बाद गिरोह द्वारा फरियादी से ₹2 करोड़ की राशि प्राप्त करने की योजना को अंतिम रूप दिया गया। भोपाल के जहांगीराबाद स्थित बाबूलाल कांतीलाल कोरियर ऑफिस पर फरियादी से ₹2 करोड़ की नकद राशि प्राप्त की गई।
जांच में सामने आया कि अंगड़िया हेड आरिफ हुसैन के कहने पर सन्नी उर्फ शमीम मंडल एवं मुस्कीम मंडल राशि लेने के लिए जहांगीराबाद, भोपाल पहुंचे थे। दोनों ने फरियादी से ₹2 करोड़ की नकद राशि प्राप्त की और इसके बाद फरियादी को विश्वास में रखने के लिए ₹4 करोड़ के RTGS का फर्जी स्क्रीनशॉट दिखाकर वहां से फरार हो गए।राशि प्राप्त होने के बाद गिरोह के सदस्यों द्वारा रकम को अलग-अलग स्थानों एवं व्यक्तियों के माध्यम से स्थानांतरित करने, बांटने एवं खपाने का कार्य किया गया। जांच में आरिफ हुसैन, नवीन जैन, कांतीलाल उर्फ कमल, अशोक चौधरी एवं बोनी यामीन की भूमिका राशि को महाराष्ट्र से अलग-अलग व्यक्तियों एवं स्थानों तक पहुंचाने, बांटने तथा खपाने में सामने आई है।
1. आरिफ निवासी ओवला, ठाणे वेस्ट, महाराष्ट्र2. अशोक बोरीवली वेस्ट, मुंबई, 3. नवीन जैन जोधपुर, राजस्थान 4. सन्नी उर्फ शमीम मंडल मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल5. मुस्कीम मंडल मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल6. कांतीलाल उर्फ कमल माली गोलीगुड़ा, हैदराबाद 7. बोनी यामीन मंडल, मुर्शिदाबाद, पश्चिम बंगाल8. वासुदेव गाडेकर, ग्राम किवले, पुणे, महाराष्ट्र 9. दिनेश वीरानी निवासी नागपुर महाराष्ट्र 10. प्रफुल्ल गजभिये, नागपुर, महाराष्ट्र 11. सचित कामले, नागपुर 12. सुजीत टेंबेकर, निवासी ग्राम पिनकेपार डकरम सुकड़ी, जिला गोंदिया, महाराष्ट्र13. माधव असोरे, उम्र 46 वर्ष, निवासी नांदेड, महाराष्ट्र — 14. साहिल नीसवाडे, नागपुर, महाराष्ट्रगिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य व्यक्तियों, फर्जी कम्पनी/ई-मेल संचालन, हवाला/आंगड़िया नेटवर्क, बैंक खातों एवं ठगी की राशि के लेन-देन के संबंध में जानकारी एकत्रित की जा रही है। जप्त मोबाइल एवं इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तकनीकी जांच जारी है। उक्त प्रकरण में विवेचना के दौरान पाया गया कि आरोपी गणों द्वारा इंदौर में भी इसी प्रकार धोखाधड़ी करने का प्लान बनाया था परंतु राजगढ़ पुलिस द्वारा आरोपीगणों की गिरफ्तारी की जाने से उक्त प्लान फेल हो गया।
आरोपी गणों द्वारा इसके पूर्व में पश्चिम बंगाल में 50 लाख एवं दिल्ली पुलिस के अधिकारी के साथ भी 50 लाख की धोखाधड़ी की है साथ ही यह भी जानकारी प्राप्त हुई है कि आरोपी गणों के ऑफिस उदयपुर बंगाल इंदौर भोपाल दिल्ली मुंबई में भी है।उक्त संपूर्ण कार्रवाई में जिला राजगढ़ पुलिस की विशेष टीम के साथ-साथ मुंबई, नांदेड़,लातुर,भदौही,पुणे, हैदराबाद,केरल, तेलंगाना,भोपाल, की टीम ने टीम ने आरोपियों की गिरफ्तारी व राशि बरामद करने में मदद की।राजगढ़ पुलिस नागरिकों से अपील की है कि कम समय में पैसा दोगुना करने, अत्यधिक लाभ देने अथवा किसी बड़ी कम्पनी के नाम पर निवेश का लालच देने वाले व्यक्तियों पर विश्वास न करें। किसी भी निवेश से पहले संबंधित कम्पनी एवं योजना का आधिकारिक माध्यम से सत्यापन अवश्य करें।


