कोरोना संकट के बीच बोले गडकरी- छोटे उद्यमियों का हौसला टूटने नहीं देना – Coronavirus lockdown minister of micro small and medium enterprises nitin gadkari

  • केंद्रीय मंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए की बातचीत
  • समस्या से जल्दी जरूर बाहर निकल आएंगेः गडकरी

कोरोना के चलते लॉकडाउन का सबसे ज्यादा असर देश के कुटीर एवं छोटे उद्योगों पर पड़ा है. इससे छोटे उद्यमी भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं. सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री नितिन गडकरी लगातार तमाम स्टेक होल्डर्स से बातचीत कर रहे हैं. केंद्रीय मंत्री गडकरी का कहना है कि छोटे और मझोले स्तर के उद्यमियों का हौसला टूटने न पाए, इसके लिए मंत्रालय हर संभव उपाय करेगा. ये देश की अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी है.

गडकरी पिछले 3 दिनों से लगातार सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम से जुड़े लोगों से बात कर रहे हैं. उन्होंने औद्योगिक संगठन फिक्की से जुड़े तमाम एमएसएमई उद्यमियों से और पीएचडी चेंबर के उद्यमियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत की. इस दौरान गडकरी ने कहा कि कोरोना ने पूरी अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है. बैंकों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. यकीन मानिए, हम इस समस्या से बहुत जल्दी जरूर बाहर निकल आएंगे.

सूत्रों की मानें तो सभी उद्यमियों ने ये मांग कि उन्हें उनके तैयार वस्तु की कीमत और वर्तमान बैंक लोन का 25 प्रतिशत और बिना ब्याज के मिले. वहीं, इस पर सरकार बीच का रास्ता निकालने पर विचार कर रही है. गडकरी का मानना है कि इस विपरीत समय को अपने पक्ष में मोड़कर चीन के विकल्प के तौर पर खुद को तैयार और पेश करना है. उदाहरण के तौर पर वो मानते हैं कि जापान सरकार ने चीन से जो 980 बिलियन डॉलर निकालने का फैसला किया है. वो भारत जैसे देश के लिए बड़ी राहत और उम्मीद बढ़ाने वाली बात है.

गडकरी का मानना है कि जो रिपोर्ट मिल रही है उनके मुताबिक, 18-20 लाख मजदूर देशभर के अनेक शेल्टर में रह रहे हैं. लॉकडाउन खत्म होने के बाद उनमें विश्वास बहाली के लिए और काम पर लौटने के लिए राज्य सरकारों और सभी उद्यमियों को सामूहिक प्रयास करने होंगे.

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गडकरी के मुताबिक, एमएसएमई सेक्टर में सबसे ज्यादा मजदूर काम करते हैं. करीब 11 करोड़ मजदूर इस सेक्टर से जुड़े हैं. जो मजदूर पलायन कर गांव का रुख कर चुके हैं, इसके मद्देनजर वहीं एक ब्रिज प्लान बनाकर और करीब 400 क्लस्टर में 2-2 करोड़ रुपये लगाने के हिसाब से ग्राम आधारित सूक्ष्म उद्योग धंधे को शुरू करने पर भी सपूर्ति नामक प्लान बनाया जा रहा है. इसके अलावा लॉकडाउन खत्म होते ही सड़क निर्माण का काम 3 गुने तेजी से किया जाएगा, जिसमें मजदूरों की भारी मांग होगी.

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नितिन गडकरी का कहना है कि लॉकडाउन से करीब एक करोड़ ट्रक से जुड़े लोगों का रोजी रोजगार पूरी तरह ठप है. इसके लिए ट्रांसपोर्टर त्वरित राहत चाहते हैं. उनके मुताबिक लोडर की अनुपलब्धता और गोदाम मालिकों के रूखे व्यवहार के चलते देशभर में लगभग 4 लाख ट्रक नॉन-एसेंशियल माल लाद कर खड़े हैं, जिसपर लगभग 40 हजार करोड़ का माल लदा हुआ है. इन सभी नुकसानों की भरपाई कैसे होगी, इस पर विचार किया जा रहा है.

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