कोरोना संकट काल में दिल्ली का ये RWA बना मिसाल, लोगों के लिए बनाया क्वारनटीन सेंटर – Corona virus south delhi rwa quarantine centre people facilities atrc

  • कम्युनिटी सेंटर को क्वारनटीन सेंटर में बदला गया
  • ऑक्सीजन सिलेंडर की भी व्यवस्था की गई

देश की राजधानी दिल्ली में जहां टेस्टिंग की संख्या बढ़ रही है तो कोरोना से संक्रमित मरीजों की तादाद में भी लगातार इजाफा हो रहा है. केजरीवाल सरकार पहले ही अंदेशा जता चुकी है कि जुलाई के अंत तक संक्रमित मरीजों की संख्या 5 लाख तक पहुंच सकती है. हालांकि, इस बीच रिकवर होने वाले मरीजों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है जो एक अच्छा संकेत हैं.

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के मुताबिक, दिल्ली के अस्पतालों में कुल 6000 मरीज हैं, जबकि 12000 मरीजों को होम क्वारनटीन में रखा गया है. पहले रोज 5000 टेस्ट के मुकाबले अब उनकी संख्या 3 गुना से ज्यादा बढ़कर 18000 टेस्टिंग हो गई है.

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सरकार के आदेशों के मुताबिक, जिन संक्रमित मरीजों के अंदर लक्षण नहीं हैं या वायरस के बेहद कम लक्षण हैं ऐसे मरीजों को घर पर ही आइसोलेशन में रखा जा सकता है. जाहिर है अस्पतालों में बेड की संख्या पर्याप्त नहीं है. इन्हीं चुनौतियों से निपटने हुए दिल्ली वाले खुद ही मदद के लिए आगे आए हैं. दक्षिणी दिल्ली में स्थानीय लोगों ने अपनी सोसाइटी के लोगों की मदद करने के लिए एक टेंपरेरी क्वारनटीन सेंटर बना लिया है.

दक्षिणी दिल्ली के ग्रेटर कैलाश इलाके में नर्मदा रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने अपनी सोसाइटी में रहने वाले 416 परिवारों की हिफाजत के लिए सोसायटी के भीतर ही खाली पड़े कम्युनिटी सेंटर को अब क्वारनटीन सेंटर में बदल दिया है.

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आइसोलेशन सेंटर में हैं 4 बेड

कुछ दिन पहले तक ये कम्युनिटी सेंटर किसी इस्तेमाल में नहीं आता था. लेकिन वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुुए यहां रहने वाले लोगों ने इसे क्वारनटीन सेंटर में तब्दील कर दिया है. इस आइसोलेशन सेंटर में 4 बेड हैं और दो बड़े एयर कंडीशन लगे हैं. यह चारों बेड एक दूसरे से काफी दूरी पर रखे गए हैं और आइसोलेशन के लिए ऐसे पर्दे लगाए गए हैं जिनके चलते यह क्वारनटीन सेंटर किसी अस्पताल की तरह नजर आता है.

नर्मदा रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के प्रेसिडेंट पुष्कर सिन्हा अपनी इस कोशिश को लेकर खासा उत्साहित हैं. पुष्कर सिन्हा ने बताया कि आरडब्लूए में कुल 416 परिवार रहते हैं और आपात स्थिति में किसी को अस्पतालों में बेड ना मिलने तक उन्हें रखने और ऑक्सीजन से लेकर बुनियादी इलाज मुहैया कराने के मकसद से हमने ये शुरुआत की है.

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जिन मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ सकती है उनके लिए ऑक्सीजन सिलेंडर भी रखे गए हैं. ऑक्सीजन सिलेंडर से चेहरे पर लगाने वाले ऑक्सीजन नोजल और ऑक्सीजन की मात्रा नापने वाले ऑक्सीमीटर जैसे आधुनिक मशीनें भी यहां मौजूद हैं.

संक्रमित मरीजों का हालचाल लेने के लिए आने वाले मेडिकल स्टाफ के लिए पीपीई किट की भी पूरी व्यवस्था की गई है. आपात स्थिति में अगर किसी बुजुर्ग या कमजोर मरीज को घर से कोई क्वारनटीन सेंटर लाने या एंबुलेंस तक ले जाने में ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है तो उसकी व्यवस्था के लिए पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर भी रखा हुआ है.

दक्षिणी दिल्ली का यह आरडब्लए लोगों के लिए मिसाल बन गया है जो इस महामारी में अपने लोगों के लिए तैयारियों को लेकर एक कदम आगे है.

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