Japan changes administrative status of disputed islands, China sends its ship | जापान ने विवादित द्वीपों की प्रशासनिक स्थिति बदली, चीन ने भेजे अपने जहाज

नई दिल्‍ली: जापान (Japan) ने हाल ही में उन द्वीपों की प्रशासनिक स्थिति को बदलने के लिए एक विधेयक को मंजूरी दे दी है, जिन पर चीन और जापान (China Japan Disputed Islands) दोनों ने दावा किया है. अब यह दोनों देशों के लिए असहमति का एक कारण बन गया है.

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ये है इसका प्रशासनिक उद्देश्य
जापान के ओकिनावा नगर परिषद ने सोमवार को इस बिल को मंजूरी दे दी. इसके बाद इशिगाकी सिटी काउंसिल जापान में सेनकाकस और चीन में डियाओउ के रूप में चिन्हित द्वीप समूह की प्रशासनिक स्थिति को बदल देगा. बता दें कि इस द्वीप समूह में वर्तमान में लोग नहीं रहते हैं. 

उधर जापान की इस घोषणा के बाद, बीजिंग ने अपने तट रक्षक जहाजों (Chinese Ships) को इस क्षेत्र में भेजते हुए जापान के इस कदम का विरोध किया है.

जापान की स्थानीय मीडिया में बताया गया है कि इस विधेयक के अनुसार, द्वीप समूह के प्रशासनिक नाम को टोनोशीरो से बदलकर टोनोशीरो सेनकाकू किया जाएगा.

इन द्वीपों के समूह का क्षेत्रफल 1,931 किलोमीटर (लगभग 1,200 मील) है और यह टोक्यो के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थित है. 1972 के बाद से जापानी प्रशासन के तहत, चीन ने भूमि पर अपने कब्‍जे का दावा करते हुए कहा था कि यह सैकड़ों साल पहले से उसका है.

चीन ने भेजे जहाज 

जापान की इस घोषणा से तिलमिलाए चीन ने तत्‍काल प्रतिक्रिया देते हुए एक बयान जारी किया. चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियन ने कहा, ‘डियाओयू द्वीप और उससे संबद्ध द्वीप चीन के निहित क्षेत्र हैं. हम चीन की क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा करने में दृढ़ है. यह तथाकथित प्रशासनिक फेरबदल चीन के क्षेत्रीय संप्रभुता को उकसाने वाला है.’

इसके अतिरिक्त, चीन ने द्वीपों के आसपास के क्षेत्र में जहाजों के “बेड़े” को भेज दिया है.

चीन ने कहा, ‘हम जापान को चार-सिद्धांत की सहमति की भावना का पालन करने के लिए कहते हैं. डियाओयू द्वीप समूह के मुद्दे पर नई घटनाओं को निर्मित करने से बचें और पूर्वी चीन सागर की स्थिति की स्थिरता को बनाए रखने के लिए व्यावहारिक कार्रवाई करें.’

हालांकि, जापान का दावा है कि यह कदम देश के भीतर प्रशासनिक कार्य को आसान बनाने के लिए किया गया था, इसलिए किसी भी अंतरराष्‍ट्रीय प्रतिक्रिया को ध्यान में नहीं रखा गया.

परिषद ने कहा, ‘इस मामले की मंजूरी अन्य देशों के प्रभाव को ध्यान में नहीं रखती थी, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रियाओं की दक्षता में सुधार करने के लिए इसे किया गया.’ 

गौरतलब है कि द्वीपों के आसपास के क्षेत्र में चीन की उपस्थिति पिछले कुछ महीनों से बढ़ रही है. जापानी सरकार ने दावा किया कि अप्रैल के मध्य से चीनी जहाजों को देखा जा रहा था, जो इस क्षेत्र में सबसे अधिक देखे जाने के लिए नया रिकॉर्ड स्थापित कर रहे थे. 




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