which oil is good for health: Olive Oil vs Vegetable Oil: जैतून और वनस्पति तेल में से कौन है दिल की सेहत के लिए अच्छा? जानें दोनों के बीच अंतर

हमारे द्वारा खाए जाने वाले अधिकांश खाद्य पदार्थों में तेल भी एक महत्वपूर्ण सामग्री है। करी, केक, सलाद या ड्रेसिंग हो – तेल का प्रयोग सभी में किया जाता है। चूंकि यह कई व्यंजनों का एक हिस्सा है जिसके जरिए हम तमाम तरह के फूड आइटम्स को बनाते हैं, इसलिए इसकी अच्छी गुणवत्ता और हेल्दी तेल का उपयोग करना बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि हम में से बहुत से लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हैं लिहाजा हमें हमेशा अपने खान-पान की क्वालिटी के बारे में जानकारी होना भी जरूरी है।

बाजार में सूरजमुखी तेल (sunflower oil), सरसों का तेल (mustard oil), नारियल का तेल (coconut oil), वनस्पति तेल (vegetable oil), जैतून का तेल (olive oil) जैसे तमाम कुकिंग ऑइल उपलब्ध हैं। हालांकि, अधिकतर लोग जैतून और वनस्पति तेल का चुनाव करते हैं। यहां हम आपको इन दोनों के बीच अंतर बता रहे हैं और साथ ही ये भी बता रहे हैं आपकी सेहत के लिए दोनों में से कौन सा ज्यादा अच्छा फूड ऑइल है।

​जैतून का तेल (​Olive oil)

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जैतून का तेल का प्रयोग 6000 साल पहले ईरान, सीरिया और फिलिस्तीन में उत्पन्न हुआ था। भूमध्यसागरीय क्षेत्र में जैतून के पेड़ सबसे अधिक लोकप्रिय हैं। ऐतिहासिक रूप से जैतून का तेल प्रयोग धार्मिक समारोहों और चिकित्सा में भी खूब किया गया है। यह कई संस्कृतियों के लिए भोजन का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गया है। अब तीन प्रकार के जैतून के तेल उपलब्ध है जिनमें एक्र्स्ट्रा वर्जिन जैतून का तेल, जैतून का तेल, और लाइव टेस्टिंग ओलिव ऑइल।

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​वनस्पति तेल (Vegetable oil)

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वनस्पति तेल पौधों के अर्क (extracts) को रिफाइन करके बनाए जाते हैं। ये पौधे कमरे के तापमान (room temperature) पर तरल रूप में रहते हैं। कई पौधे तेल का उत्पादन करते हैं लेकिन इसे आमतौर पर बीजों से निकाला जाता है। वनस्पति तेल कई तेलों के मिश्रण से बनाया जा सकता है। विभिन्न प्रकार के तेल विभिन्न पौधों के बीजों पर निर्भर करते हैं जिनसे वे निकाले जाते हैं। उदाहरणों में ताड़, सोयाबीन, सूरजमुखी, मूंगफली, कपास, नारियल, जैतून, मकई का तेल आदि शामिल हैं।

​जैतून का तेल और वनस्पति तेल के बीच अंतर

वनस्पति तेल का सोर्स पौधे के बीज या मेवे हैं जबकि दूसरी ओर जैतून के तेल का जैतून से प्राप्त होता है। आम तौर पर वनस्पति तेल का स्वादहीन होता है जबकि जिन खाद्य पदार्थों में जैतून के तेल का प्रयोग होता है उनमें हमेशा एक स्पेशल टेस्ट होता है जो सबसे अलग होता है।

दोनों के स्मोक पॉइंट (जिस तापमान पर तेल धुंआ निकलने लगता है) की बात करें तो वनस्पति तेल में से गर्म होने पर 200 डिग्री सेल्सियस से 250 डिग्री सेल्सियस के बीच धुंआ निकलने लगता है। जैतून के तेल का स्मोक पॉइंट 190 से 240 डिग्री सेल्सियस के बीच होता है।

जैतून का तेल खाना पकाने के लिए प्रयोग किया जाता है लेकिन ये स्किन के लिए भी बहुत फायदेमंद है। इसका प्रयोग कई तरह के औषधियां बनाने में भी होता है। दूसरी ओर वनस्पति तेलों का उपयोग खाना पकाने के लिए किया जाता है और इसके अलावा इसका ईंधन, सौंदर्य प्रसाधन, औषधीय और अन्य इंडस्ट्री में भी इस्तेमाल किया होता है।

​दोनों तेल की न्यूट्रिशन्स वैल्यु और फायदे

जैतून और वनस्पति दोनों तेलों में असंतृप्त वसा अम्ल (unsaturated fatty acids) होते हैं। जैतून के तेल में मोनोअनसैचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक होती है वहीं वनस्पति तेल में ओमेगा -6 पॉलीअनसेचुरेटेड फैट हाई मात्रा में होता है। जैतून में मौजूद मोनोअनसैचुरेटेड फैट हृदय-स्वास्थ्य के लिए अच्छा है जबकि वनस्पति तेल की सामग्री ओमेगा -6 पॉलीअनसेचुरेटेड फैट दिल की सेहत को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

इसके अलावा, एक तेल जितना अधिक रिफाइन होता है, उतने ही कम सूक्ष्म पोषक तत्व और स्वस्थ यौगिक इसे बरकरार रखते हैं। एक्सट्रा वर्जन जैतून ऑइल एंटीऑक्सिडेंट और एंटी इंफ्लेमेटरी कंपाउड्स से समृद्ध है। दूसरी ओर, वनस्पति तेल बनाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली शोधन प्रक्रिया सूक्ष्म पोषक तत्वों, एंटीऑक्सिडेंट और लाभकारी पौधों के यौगिकों को नष्ट कर देती है।

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