राजनगर से छतरपुर जांच कराने आई 40 वर्षीय महिला, ₹1000 जमा कर लगाया था नंबर, आधे घंटे इंतजार के दौरान शुरू हुई प्रसव पीड़ा

छतरपुर में जिला अस्पताल के बाहर स्थित निजी सोनोग्राफी सेंटर के बाहर उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब जांच के इंतजार में बैठी एक 40 वर्षीय प्रसूता ने मेडिकल दुकान के सामने मृत शिशु को जन्म दे दिया। महिला राजनगर क्षेत्र के खजवा गांव से सोनोग्राफी कराने छतरपुर आई थी। परिजनों के मुताबिक, सोनोग्राफी सेंटर पर ₹1000 जमा कर नंबर लगाया गया था। करीब आधे घंटे इंतजार के बाद महिला को तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और सेंटर के बाहर ही उसका प्रसव हो गया।घटना की जानकारी मिलते ही जिला अस्पताल के प्रसूता वार्ड से प्रशिक्षित स्टाफ नर्स और व्हीलचेयर मौके पर भेजी गई। मेडिकल दुकान के बाहर ही प्रसव के बाद की जरूरी प्रक्रिया पूरी कर महिला को जिला अस्पताल लाया गया, जहां उसका उपचार चल रहा है। महिला की हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है।गर्भ में पहले ही हो चुकी थी शिशु की मौत:अस्पताल स्टाफ के मुताबिक नवजात मृत अवस्था में पैदा हुआ। बच्चे के शरीर का रंग काला-नीला पड़ा हुआ था। डॉक्टरों ने प्रथम दृष्टया आशंका जताई है कि गर्भ में ही कुछ दिन पहले उसकी मौत हो चुकी थी। हालांकि मौत कब और किस वजह से हुई, यह चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।दो महीने पहले दी गई थी सोनोग्राफी की सलाह:परिजनों के मुताबिक, करीब दो महीने पहले डॉक्टर ने आरती को सोनोग्राफी कराने की सलाह दी थी, लेकिन आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उस समय जांच नहीं हो सकी। शुक्रवार को उसके दामाद वीरेंद्र पटेल उसे राजनगर से छतरपुर लेकर आया था। परिजनों ने बताया कि राजनगर में बच्चे की हलचल नहीं होने पर सोनोग्राफी कराने की सलाह दी गई थी।प्रसव के बाद लौटाए गए ₹1000:परिजनों के मुताबिक, प्रसव होने के बाद निजी सोनोग्राफी सेंटर की ओर से जमा किए गए ₹1000 वापस कर दिए गए।दामाद बोला- सीधे सोनोग्राफी सेंटर आया था:आरती के दामाद वीरेंद्र पटेल ने बताया कि वह राजनगर से सीधे सोनोग्राफी सेंटर लेकर आया था। जिला अस्पताल जाने की उसकी योजना नहीं थी। सेंटर के बाहर ही अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई और महिला ने मृत शिशु को जन्म दिया। इसके बाद वह घबरा गया और जिला अस्पताल पहुंचकर स्टाफ को जानकारी दी, जिसके बाद अस्पताल की टीम मौके पर पहुंची और महिला को अस्पताल ले गई।सिविल सर्जन बोले- महिला अस्पताल आई ही नहीं थी:जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. शरद चौरसिया ने बताया कि प्रसूता प्रसव पीड़ा के दौरान जिला अस्पताल नहीं आई थी। वह सीधे अस्पताल के बाहर स्थित सोनोग्राफी सेंटर पहुंची थी। सेंटर के बाहर प्रसव की जानकारी मिलते ही प्रसूता वार्ड की इंचार्ज वर्षा चतुर्वेदी के माध्यम से प्रशिक्षित स्टाफ को मौके पर भेजा गया। जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।डॉक्टर के मुताबिक, नवजात मृत पैदा हुआ था और प्रथम दृष्टया गर्भ में पहले ही उसकी मौत होने की आशंका है। समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण महिला का उपचार किया जा सका। मृत गर्भस्थ शिशु के कारण मां के स्वास्थ्य को भी खतरा हो सकता था।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here