Assam Election Exit Polls : तो क्या यह मान लें कि असम चुनाव में फेल हो गया छत्तीसगढ़िया फार्मूला?

छत्तीसगढ़ कांग्रेस की पूरी टीम भूपेश बघेल की अगुवाई में असम चुनाव में जुटी थी.

छत्तीसगढ़ कांग्रेस की पूरी टीम भूपेश बघेल की अगुवाई में असम चुनाव में जुटी थी.

Assam Exit Polls: अगर यह एग्जिट पोल सही साबित होते हैं तो कांग्रेस को जबर्दस्त झटका लगने वाला है. पोल के यह साफ संकेत हैं कि असम विधानसभा चुनाव का किला जीतने के लिए कांग्रेस का ‘छत्तीसगढ़िया फार्मूला’ बुरी तरह फेल होने जा रहा है, जिसके लिए भूपेश बघेल ने ताकत झोंक दी थी.

रायपुर. असम विधानसभा चुनाव (Assam Assembly Election) के नतीजे तो 2 मई को सामने आएंगे, लेकिन नतीजों को लेकर एक्जिट पोल (Exit Poll) की तस्वीर आ गई है. इन एक्जिट पोल्स के मुताबिक असम में भगवा पार्टी यानी भाजपा जनता पार्टी (BJP) की सत्ता में फिर से वापसी हो रही है. अगर यह पोल सही साबित होते हैं तो कांग्रेस (Congress) को जबर्दस्त झटका लगने वाला है. पोल के यह साफ संकेत हैं कि असम विधानसभा चुनाव का किला जीतने के लिए कांग्रेस द्वारा अपनाया गया छत्तीसगढ़िया फार्मूला बुरी तरह फेल होने जा रहा है. जिसके लिए कांग्रेस आलाकमान से लेकर छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) तक ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी और छत्तीसगढ़ से 100 से ज्यादा सियासी सूरमा असम ले जाकर वहां के चुनाव मैदान में उतार दिए थे. जाहिर है इस चुनाव के नतीजों का असर छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेताओं के कद पर भी निश्चित तौर पर पड़ वाला है. बता दें कि असम विधानसभा की कुल 126 सीटों के लिए तीन चरणों में मतदान हुआ था. सत्ता तक पहुंचने किसी भी पार्टी को बहुमत के लिए 64 सीटें हासिल करना जरूरी है. असम में चुनाव नतीजों के लेकर एग्जिट पोल सामने आ गए हैं. इंडिया टुडे, एक्जिम, चाणक्य, एबीपी, सी वोटर, सीएनएक्स सहित विभिन्न न्यूज चैनल्स ने अपने पोल्स में असम में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को 61 से 84 सीटें मिलने का अनुमान व्यक्त किया है. यानी एक बार फिर असम में भगवा दल सत्ता में आ सकता है. असम में कांग्रेस के नेतृत्व में 10 दलों को साथ लेकर महाजोत गठबंधन किया गया था. एक्जिट पोल के मुताबिक कांग्रेस वाले गठबंधन को इन चुनावों में 50 सीटें तक मिल सकती हैं. कुल एक्जिट पोल्स का अनुमान है कि कांग्रेस-भाजपा के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलेगी. कांग्रेस भाजपा को चुनौती देने के लिए सीटों के मुकाबले में उसके काफी नजदीक पहुंच सकती है. त्रिशंकु विधानसभा की स्थितियां भी बन सकती हैं, ऐसे में निर्दलीय और दीगर छिटपुट पार्टियों के विधायकों की भूमिका अहम रहेगी.

क्या था ‘छत्तीसगढ़िया फार्मूला’

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