बैंकॉक: थाईलैंड (Thailand) की सरकार ने पांच से अधिक लोगों के एक साथ खड़े होने पर रोक लगाई हुई है. ये रोक कोरोना की वजह से नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरे की वजह से है. हालांकि एक छात्रनेता के बुलावे पर बैंकॉक (Bangkok) की जनता मानों सडकों पर ही उतर आई, और देश के राजा महा वजीरालोंगकोर्न के साथ ही प्रधानमंत्री प्रयुत चन ओचा (Prayuth Chan Ocha) के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और प्रधानमंत्री से गद्दी छोड़ने की मांग की.
क्या है पूरा मामला?
थाईलैंड में सत्ता विरोधी प्रदर्शन लगातार तेज होते जा रहे हैं. पुलिस सरकार विरोधी प्रदर्शनों के नेता पेरित चिवारक और वकील एर्नोन नांपा को गिरफ्तार कर चुकी है. पेरिस पर राष्ट्रद्रोह का मामला दर्ज किया गया है, जिसके बाद एक छात्रनेता जुतातीप सिरिखन (Student Leader Jutatip Sirikhan) ने मोर्चा संभाल लिया और प्रदर्शनकारियों से शाम पांच बजे सड़कों पर उतरने का आह्वान किया. जिसके बाद करीब 10 हजार लोगों ने बैंकॉक की सडकों पर जोरदार प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारी देश में राजनीतिक सुधारों की मांग कर रहे हैं.
प्रदर्शन कर रहे युवाओं को चेतावनी
बैंकॉक में इन प्रदर्शनों के खिलाफ पुलिसिया दमन भी काफी जोरों पर है. पुलिस अबतक सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. बैंकॉक पुलिस की उप प्रमुख पिया तावीचई ने कहा कि सभी प्रदर्शनकारियों को दंडित किया जाएगा. उन्होंने प्रदर्शन कर रहे बच्चों और युवाओं से कहा कि उन्हें प्रदर्शन की कीमत भविष्य में भी चुकानी पड़ती सकती है. थाईलैंड में पांच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर रोक है, तो अखबारों, ऑनलाइन खबर देने वाले चैनलों पर सेंसर के कड़े नियम लागू किए हैं.
प्रधानमंत्री प्रयुत के इस्तीफे की मांग
प्रदर्शन कर रहे लोगों का प्रमुख मांग प्रधानमंत्री प्रयुत चन ओचा को पद से हटाने और देश में राजनीतिक सुधार लाने की है. इस बीच यूरोपीय संघ (European Union) ने थाई सरकार से प्रदर्शनकारियों के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की है.


