कवर्धा. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) भाजयुमो (BJYM) के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व बीजेपी नेता (BJP Leader) विजय शर्मा (Vijay Sharma) और उनके अधिवक्ता पोखराज सिंह परिहार ने पुलिस व सरकार पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं. उनका कहना है कि पुलिस विजय शर्मा को एनकाउंटर कर मारना चाहती थी. बीते 22 अक्टूबर की गिरफ्तारी (Arrest) के बाद बार-बार जेल बदलने से उनको इस बात की आशंका हुई थी. किसी बहाने कवर्धा से रायपुर लाते लेजाते नुकसान पहुंचाने की साजिश थी. सही समय पर न्यायालय से निवेदन करने पर बार-बार जेल शिफ्टिंग से उन्हें राहत मिली थी. विजय शर्मा का कहना है कि घटना को एक माह से ज्यादा का समय बीत गया है, लेकिन अब तक किसी भी अधिकारी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इतने बड़े घटनाक्रम के बाद भी क्या किसी की जवाबदेही नहीं बनती है.
कवर्धा (Kawardha) में धार्मिक झंडे को लेकर हुए विवाद के बाद बीजेपी विजय शर्मा और अन्य की गिरफ्तारी की गई थी. बीते शुक्रवार को विजय शर्मा जमानत पर बाहर आए. इसके बाद प्रेस वार्ता कर पुलिस और सरकार पर गंभीर आरोप लगाए. विजय शर्मा ने कहा कि आखिर विवाद की जिम्मेदारी किसकी है. सरकार ने इसके लिए ना तो एसपी पर ही कार्रवाई की है और ना ही कलेक्टर पर. यहां तक की कोतवाली थाना प्रभारी जो वारदात के समय मौके पर मौजूद थे, उनकी उपस्थिति में झंडा नीचे गिराया गया. दुर्गेश के साथ मारपीट हुई, लेकिन सरकार केवल दूसरे पक्ष के लोगों पर ही बर्बरता पूर्वक कार्रवाई की है. पूरी तरह से प्रशासन ने भेदभाव किया है.
साजिश के तहत की गिरफ्तारी
मीडिया से बात करते हुए विजय शर्मा ने कहा कि सरकार के इशारे पर पुलिस प्रशासन ने उनके खिलाफ साजिश रची. जनता की मांग पर राशन कार्ड बनाने की मांग लेकर खाद्य कार्यालय जाने से एट्रोसिटी एक्ट लगाया जाता है. जनप्रतिनिधि अगर जनता का काम शासकीय कार्यालय जाकर नहीं करेगा तो कहा करेगा. खाद्य विभाग में जो कुछ भी हुआ. उसका वीडियो बना है. कहीं पर भी डराते धमकाते वाला वीडियो तो बताएं. जिस दिन ये घटना हुई थी. उस दिन के बाद खाद्य अधिकारी के द्वारा पहला आवेदन दिया गया, जिसमें जातिसूचक गाली देने का कोई उल्लेख नहीं है. 22 अक्टूबर को सरेंडर करने के बाद नया आवेदन लेकर एट्रोसिटी एक्ट लगाया गया. ताकि पहले वाले विवाद में जमानत मिले तो दूसरे मामले में जमानत ना मिले.
एसपी ने आरोप को बताया बेबुनियाद
बीजेपी नेता विजय शर्मा और उनके वकील के आरोप मामले में कवर्धा एसपी मोहित गर्ग का कहना है कि पुलिस किसी आरोपी को न्यायालय के आदेश पर जेल दाखिल कराती है. उसके बाद संबंधित की जिम्मेदारी जेल अधीक्षक की होती. इसमें पुलिस की कोई भूमिका नहीं होती है. जेल से अगर सुरक्षा को लेकर बल की मांग की जाती है, तो वह उपलब्ध कराया जाता है. पुलिस पर बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं.
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