- ज्यादातर ऐसे होटल जो घाटे में चल रहे थे, हुक्का बार खोलते ही चल पड़ी उनकी दुकान
- नियमों में पेंच होने का फायदा उठाकर होटल-रेस्टारेंट वाले धड़ल्ले से हुक्का बार चला रहे हैं
Dainik Bhaskar
Feb 09, 2020, 11:05 AM IST
रायपुर . राजधानी की 120 से ज्यादा होटल और रेस्टोरेंट में अवैध हुक्का बार चल रहे हैं। केवल गुमास्ता लाइसेंस लेकर उसी की आड़ में होटल और रेस्टारेंट संचालकों ने हुक्का बार खोल दिया। संचालन का कोई नियम नहीं इसका फायदा उठाकर बार संचालक छोटे और स्कूली बच्चों तक को एंट्री दे रहे हैं। प्रशासन और पुलिस भी सीधे कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। नियमों में पेंच होने का फायदा उठाकर होटल-रेस्टारेंट वाले धड़ल्ले से हुक्का बार चला रहे हैं। अभी जितने होटलों और रेस्टारेंट में हुक्का बार चल रहा है, उनमें ज्यादातर घाटे में चल रहे थे। हुक्का बार खोलते ही उनकी दुकान चल पड़ी।
हुक्का बार में छात्र-छात्राओं कई तरह का फ्लेवर तक उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए भी हुक्का बार संचालकों में होड़ सी मची है। छात्रों के साथ छात्राओं को भी अलग-अलग फ्लेवर के लिए ऑफर किया जाता है। युवक-युवतियों के साथ-साथ नाबालिगों को भी प्रवेश करने से रोका नहीं जाता। पुलिस के अफसर भी मानते हैं कि ज्यादातर हुक्का बार स्कूली बच्चों के कारण चल रहे हैं। हुक्का बार में महानगरों की तर्ज पर छोटे-छोटे और मद्धिम रौशनी वाले कमरे बनाए गए हैं। हुक्का बार खोलने के लिए स्कूल-कॉलेज और अस्पतालों का भी ध्यान नहीं रखा गया। बाजार और घनी आबादी वाली बस्तियों व कालोनियों तक में हुक्का बार खोल दिए गए हैं। धीरे-धीरे इसका क्रेज इतना बढ़ता जा रहा है कि कुछ बड़े प्रतिष्ठित होटल व मॉल में भी अलग से हुक्का जोन बना दिया गया है। टेबल के आधार पर हुक्के की कीमत ली जाती है। जानकारों के अनुसार अकेले रायपुर में ही 120 से ज्यादा हुक्का बार चल रहे हैं।
इन इलाकों में सबसे ज्यादा हुक्का बार
शहर के माना वीआईपी रोड, तेलीबांधा, समता कॉलोनी और सड्डू इलाके में सबसे ज्यादा हुक्का बार चल रहे हैं। शहर की पॉश कॉलोनियांें में शुमार देवेंद्र नगर, कटोरा तालाब, अनुपम नगर, खम्हारडीह, मोवा इलाके में कई हुक्का बार चल रहे हैं। कहीं पर तो क्लब और प्ले जोन के आड़ पर हुक्के का अवैध कारोबार किया जा रहा है। ज्यादातर जगह पर एक हुक्के की कीमत 300 से 500 रुपए तक है। फ्लेवर के अनुसार कीमत बढ़ती जाती है। पुलिस और प्रशासन की रिपोर्ट में प्रमाणित हो चुका है कि हुक्के के साथ दिया जाने वाला फ्लेवर स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद घातक है। ज्यादातर संचालक इसे चाइना से मंगवा रहे हैं। इसमें तंबाकू मिला होता है। हालांकि इसके रैपर में निकोटीन फ्री लिखा रहता है, लेकिन इसमें निकोटीन की मात्रा होती है।
रायपुर में लगाया था धारा 144
रायपुर एसएसपी आरिफ शेख ने हुक्का बारों पर सख्ती करने के लिए धारा 144 लागू किया था। जहां पर हुक्का पिलाने की शिकायतें मिलती थीं, पुलिस वहां छापा मारकर प्रतिबंधित फ्लेवर जब्त करती थी। वहां धारा 144 के उल्लंघन के तहत भी कार्रवाई की गई। बाद में ये भी नियमों के पेंच में फंस गया।
गिफ्ट दुकान में खुलेआम बिक रहा ई सिगरेट
शहर के गिफ्ट दुकान से लेकर मॉल में खुले आम ई-सिगरेट बेचा जा रहा है। युवाओं से आसानी से ई- सिगरेट बहुत की सस्ते में उपलब्ध हो रही है। जबकि इस पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया है। इसके बाद भी कारोबारी इसे बेच रहे हैं। सिविल लाइंस पुलिस ने पांच दिन पहले पंडरी के एक गिफ्ट दुकान में छापा मारा, जहां तलाशी के दौरान ई-सिगरेट जब्त किया गया। दुकान संचालक के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई, लेकिन यह स्थिति सिर्फ पंडरी इलाके की नहीं है। शहर के अधिकांश इलाके में इस तरह का प्रतिबंधित सामान बेचा जा रहा है। ई सिगरेट भी हुक्का बार की ही देन है। वहां भी हुक्का का उपयोग न करने वाले युवाओं को ई सिगरेट ऑफर किया जाता है। उसी से ई िसगरेट का चलन बढ़ा है।
हुक्का बार देशभर में प्रतिबंधित
हुक्का बार देशभर में प्रतिबंधित है। सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन पर प्रतिबंध और व्यापार तथा वाणिज्य, उत्पादन, आपूर्ति और वितरण के विनियमन) अधिनियम 2003 (सीओटीपीए) के अंतर्गत 23 मई 2017 को केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर हुक्के के उपयोग पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि कुछ महानगरों में इसके संचालन के लिए बाकायदा लाइसेंस दिया जाता है। लाइसेंस देने के कई कड़े प्रावधान हैं। मोटी फीस के साथ हुक्का बार के लिए जगह के लिए भी नियम कायदे हैं। सभी शर्तें पूरी करने के बाद ही लाइसेंस जारी होता है।
कई बार छापे, पर खानापूर्ति
शहर के कई हुक्का बार में पुलिस और प्रशासन की टीम छापा मार चुकी है। राज्य में इसे लेकर सख्त कानून नहीं होने के कारण पुलिस की कार्रवाई तंबाकू उत्पाद को जब्त करने और संचालकों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई तक सीमित रह गई। आईपीसी में प्रावधान नहीं होने के कारण पुलिस कानूनी कार्रवाई नहीं कर पायी। हालांकि छापे के दौरान कई बार स्कूली यूनीफार्म तक में बच्चे मिल चुके हैं।
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