- यह भी पता नहीं लगाया जा सका कि पोर्न वीडियो छत्तीसगढ़ से जुड़े हैं या दूसरे शहरों के
- जिस कम्प्यूटर या मोबाइल से वीडियो अपलोड किए गए उनका आईपी एड्रेस ट्रेस नहीं कर सके
Dainik Bhaskar
Feb 20, 2020, 10:31 AM IST
रायपुर. महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध को रोकने पोर्न साइट्स पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठ रही है, वहीं ऐसे प्रकरणों की जांच में पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। पुलिस मुख्यालय ने रायपुर पुलिस को जांच के लिए 80 पोर्न वीडियो भेजे थे। इसकी जांच के नाम पर पुलिस ने संबंधित नंबरों के सिर्फ काॅल डिटेल ही निकाले। आईपी एड्रेस ट्रेस कर अपराधियों को पकड़ने की कोशिश नहीं की। यह भी पता नहीं लगाया जा सका कि पोर्न वीडियो रायपुर या छत्तीसगढ़ से जुड़े हैं या दूसरे शहरों के हैं।
नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की ओर से चाइल्ड पोर्न के वीडियाे जांच के लिए भेजे गए थे। इसमें यह पता लगाना था कि प्रकरण छत्तीसगढ़ से संबंधित तो नहीं हैं। पुलिस मुख्यालय ने रायपुर पुलिस को सभी वीडियो जांच के लिए दिए थे। ऐसे करीब 80 वीडियो अलग-अलग समय पर दिए गए थे, लेकिन रायपुर पुलिस टीम ने जिन नंबराें से किसी वेबसाइट या मोबाइल एप्लीकेशन पर ये वीडियो अपलोड किए थे, उसकी कॉल डिटेल रिपोर्ट मांगी थी। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं की। जब पुलिस मुख्यालय ने रिपोर्ट तलब की तो कॉल डिटेल रिपोर्ट भेज दी गई। खबर है कि इस मामले में स्पेशल डीजी आरके विज ने जांच अधिकारी के खिलाफ नाराजगी जताई है। उन्होंने जांच अधिकारी को तलब किया है।
जांच का कोई सिस्टम नहीं
ऐसे प्रकरणों की विवेचना के लिए फिलहाल जिलों में कोई सिस्टम नहीं है। पुलिस मुख्यालय से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही मामले की विवेचना किस तरह की जाएगी, यह बताने के लिए कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। अफसरों का कहना है कि जो वीडियो मिले हैं, उसमें से अभी तक यह पुष्टि नहीं हो सकी है कि वे स्थानीय हैं या सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो हैं। अफसराें का कहना है कि ज्यादातर वीडियो के वायरल हैं, जिन्हें प्राइवेट नेटवर्क बनाकर कई क्लिप में पोस्ट करने का संदेह है।
चाइल्ड पोर्न क्लिप सर्च करना भी अपराध
इंटरनेट पर चाइल्ड पोर्नोग्राफी सर्च करना या इससे संबंधित कोई भी वीडियो शेयर करना अपराध है। ऐसे मामलों में आईटी एक्ट की धारा 67बी के तहत मुकदमा दर्ज किया जाता है। इसमें पांच साल की सजा हो सकती है। अधिकारियों के मुताबिक नेशनल क्राइम फॉर मिसिंग एंड एक्सप्लोइटिड चिल्ड्रन इस पर नजर रखती है। इसके जरिए ही एनसीआरबी को वीडियो अपलोड करने या शेयर करने की जानकारी भेजी जाती है। एनसीआरबी द्वारा संबंधित प्रदेश को यह सूचना दे दी जाती है, जिससे आगे कार्रवाई हो सके।
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