Chhattisgarh News In Hindi : Family seeking CBI probe in Kishanpur murder case of Mahasamund district | साइकिल रैली निकाल रहे परिजनों को सड़क से उठाकर ले गई पुलिस, 11 साल की बच्ची को भी घसीटा

  • 2018 में महासमुंद जिले के किशनपुर गांव में एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता, उसके पति और दो बच्चों की हत्या कर दी गई थी 
  • अब  इस मामले में सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं मृतकों के परिजन, इस वजह से निकाल रहे थे साइकिल रैली 

Dainik Bhaskar

Feb 25, 2020, 08:36 PM IST

महासमुंद. जिले के ग्राम गड़बेड़ा के पास पुलिस ने साइिकल से रायपुर जा रहे युवक और उसके परिजनों को रोका। पुलिस ने 11 साल की बच्ची पर भी सख्ती दिखाई। सड़क पर यह परिवार चींखता रहा मगर पुलिस ने एक नहीं सुनी, जबरदस्ती इन्हें गाड़ी में बिठाकर थाने ले जाया गया। दरअसल, मई 2018 में पिथौरा थाना क्षेत्र के ग्राम किशनपुर में स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ एएनएम योगमाया, पति चेतन साहू और उसके दो बच्चों की निर्मम हत्या हुई थी। इसी मामले को लेकर परिजन सीबीआई जांच की मांग करते हुए यह साइकिल यात्रा निकाल रहे थे। परिवार के कुल 10 सदस्य साइकिल रैली निकालकर राजभवन और मुख्यमंत्री निवास जाना चाहते थे। मगर पुलिस ने जबरन इन्हें रोक दिया। 
 

परिजनों का कहना मास्टर माइंड अब भी बाहर
मृतिका योगमाया के ससुर और चेतन के पिता बाबूलाल साहू ने बताया कि हत्याकांड का मास्टर माइंड अब भी गिरफ्त से बाहर है। यही नहीं पुलिस ने जांच के दौरान भी कई तरह की लापरवाही बरती है। पीएम के दौरान मृतिका के गुप्तांग का परीक्षण नहीं किया गया। मृतिका का पीएम महिला डॉक्टर से नहीं कराया गया। पुलिस द्वारा हत्याकांड के इस मामले में पेश किए चालान में फोटोग्राफ्स भी नहीं हैं, हत्याकांड से जुड़े विकास पाण्डे, साईं पाण्डे को पुलिस ने गवाह बना दिया है। मामले के आरोपी धर्मेन्द्र बरिहा की नार्को टेस्ट की सीडी थाना, एसडीओपी एवं एसपी ऑफिस हमें उपलबध नहीं करा रहा है।  

यह है पूरा मामला 
साल 2018 में 30-31 मई की रात पिथौरा थाना क्षेत्र के किशनपुर में गांव में  यहां के स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ योगमाया साहू, उनकी पति चेतन साहू और दो बच्चों की नृशंस हत्या की गई थी। इस मामले में पुलिस ने गांव के धर्मेन्द्र बरिहा को गिरफ्तार किया था। इसके बाद परिजनों ने पिथौरा पुलिस से आरोपी धर्मेन्द्र बरिहा का नार्को टेस्ट कराने की मांग की। जिस पर पुलिस ने आरोपी का नार्को टेस्ट कराया। नार्को टेस्ट में गांव के सरपंच सुरेश खुंटे, फूलसिंग यादव, गौरीशंकर केंवट और रामपुर के अखंडल प्रधान का नाम सामने आया था। जिसके बाद पुलिस ने इन्हें अप्रैल 2019 में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वर्तमान में सभी आरोपी पुलिस जेल में है। 

हो चुकी है जांच
पुलिस अधीक्षक जितेन्द्र शुक्ल इस मामले में कहते हैं कि परिजनों ने जिन-जिन मुद्दों पर सवाल उठाए थे उन सभी पर जांच की जा चुकी है। पर अब तक ऐसा कुछ नहीं पाया गया। 11 साल की बच्ची को रैली में शामिल करना मानवाधिकार का घोर हनन है। रैली नहीं निकालने के लिए परिजनों को पूर्व में सूचना दे दी गई थी। उन्हें बताया गया था कि रैली की अनुमति नहीं मिली है। इनका लेटर भी उन्हें दिया गया था। वहीं हाइवे से रायपुर जाना उचित नहीं था। परिजनों को बार-बार समझाया जा रहा था, लेकिन नहीं मान रहे थे, इसलिए सुरक्षा के तहत उन्हें रोककर थाने में लाया गया। पुलिस ने उनके साथ कहीं मारपीट नहीं की। 


Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here