- रायपुर सहित कई जिलों में इनकम टैक्स के छापे की कार्रवाई जारी, स्टडी टूर और पर्यटन का पोस्टर लगाकर पहुंची टीम
- पोस्टर पर लिखा है विक्रम भट्ट का नाम और नंबर, ऐसे नंबराें को गुप्त कोड के रूप में इस्तेमाल करता है आयकर विभाग
Dainik Bhaskar
Feb 27, 2020, 06:26 PM IST
रायपुर. छत्तीसगढ़ में अब तक की सबसे बड़ी इनकम टैक्स की कार्रवाई गुरुवार सुबह से जारी है। टीम की कार्रवाई रायपुर मेयर एजाज ढेबर, पूर्व मुख्य सचिव विवेक ढांड, आईएएस अनिल टूटेजा सहित कई बड़े कारोबारियोंं पर चल रही है। टीम की गाड़ियों शैक्षणिक भ्रमण का पोस्टर लगा है और उस पर “सूत्रधार’ आचार्य विक्रम भट्ट का नाम और नंबर भी है। जब उनसे बात की गई तो बोले- धैर्य रखिए, जो होगा जल्द पता चल जाएगा।
दरअसल, कार्रवाई के लिए पहुंची इनकम टैक्स की गाड़ियों पर झारखंड और हरियाणा के नंबर लिखे हुए हैं। वहीं अलग-अलग विभाग के पोस्टर और स्टीकर लगाए गए हैं। इनमें पर्यटन विभाग और देवस्थान विभाग जैसे नाम शामिल हैं। वहीं कुछ गाड़ियों में स्टडी टूर का पोस्टर भी लगा हुआ है। इसी पोस्टर पर अखिल भारतीय बौद्धिक उत्थान संस्थान फरीदाबाद का नाम दर्ज है। उसके नीचे सूत्रधार आचार्य विक्रम भट्ट का नाम लिखा है।
जब नाम के साथ में लिखे मोबाइल नंबर पर भास्कर एप के रिपोर्टर ने उस पर कॉल कर बात की तो सामने वाले ने अपने नाम की पुष्टि की। उन्होंने अपना नाम विक्रम भट्ट जरूर बताया, लेकिन क्या करते हैं और कहां से बोल रहे हैं, ये बताने से इनकार कर दिया। इसके बाद जब कार्रवाई को लेकर उनसे बात करनी चाही तो पहले तो वह अनभिज्ञ बने रहे, लेकिन फिर कहा कि मैं क्या करता हूं, उसे जाने दीजिए, जो आएगा वो पता चलेगा। थोड़ा धैर्य रखिए।
केंद्रीय बोर्ड के नेतृत्व में हो रही है कार्रवाई
ट्रू कॉलर पर उनका नाम दिल्ली के साथ सही दर्शा रहा है। इस संबंध में जब अायकर के कुछ अधिकारियों से बात की तो उन्होंने बताया कि अक्सर कोड के रूप में ऐसे नंबरों को इस्तेमाल किया जाता है। हर नाम और नंबर का प्रयोग टीम की गाड़ी जाने के दिशा और पहचान को तय करता है। संभावना है कि इस बार छापे में ऐसा कुछ किया गया हो। हालांकि अगर मोबाइल नंबर सही दिया गया है और बात हो रही है तो इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।
बताया जा रहा है कि इस पूरी कार्रवाई को केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) लीड कर रहा है। जिनके ऊपर कार्रवाई की गई है, उन पर इंटेलीजेंस के जरिए लंबे समय से नजर रखवाई जा रही थी। अायकर विभाग के अधिकारी बताते हैं कि जब कोई कार्रवाई की जाती है तो इसकी जानकारी लिफाफे में सील बंद होती है। कार्रवाई के दौरान तक पता नहीं होता है। जब निर्देश मिलते हैं तभी लिफाफा खोलते हैं। अगर स्थानीय अधिकारी शामिल नहीं है तो संभवत: कार्रवाई बड़ी है या फिर राजनीतिक है।
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