chicken disease: Apocalyptic Virus: अगर ये वायरस आया तो मिटा देगा आधी दुनिया! – poultry farms apocalyptic virus could be more lethal then corona in hindi

Edited By Garima Singh | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

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अभी दुनिया कोविड-19 से जूझ रही है और इसका कारगर इलाज भी नहीं ढ़ूंढ पाई है। ऐसे में ऑस्ट्रेलिया के हेल्थ एक्सपर्ट और सायंटिस्ट डॉक्टर माइकल ग्रेगर ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा है कि चिकन का मास प्रोडक्शन रोकना बेहद जरूरी है। नहीं तो जिस तरह से आज के समय में बड़े स्तर पर चिकन फार्मिंग हो रही है, वह एक और खतरनाक महामारी की वजह बन सकती है। यह महामारी कोरोना से भी अधिक घातक और जानलेवा होगी। डॉक्टर ग्रेगर के अनुसार, चिकन फर्म में पनपने वाला वायरस ‘एपोकैलिक’ इतना घातक होगा कि दुनिया की आधी जनसंख्या को खत्म कर सकता है!

ऑस्ट्रेलियन न्यूज साइट्स के अनुसार, डॉक्टर ग्रेगर का कहना है कि पोल्ट्री फर्म्स (मुर्गी पालन घर) में पनप रहे रोग मानवता के लिए कोरोना से अधिक घातक खतरा हैं। दुनिया की फूड हेबिट के बारे में और भविष्य में इसके कारण होनेवाले खतरों के बारे में अपनी पुस्तक ‘हाउ टु सर्वाइव ए पैंडेमिक’ में डॉक्टर ग्रेगर ने लिखा है कि जिस तरह से पूरी दुनिया अपनी खान-पान की आदतों को लेकर तेजी से मीट पर निर्भर हो रही है, इसके चलते हम दुनिया को कोविड-19 से भी अधिक घातक वायरस की जद में डाल रहे हैं।

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चिकन खाने के नुकसान

ग्रेगर कहते हैं कि यदि ऐसा ही चलता रहा और हम समय रहते सतर्क नहीं हुए तो आनेवाले समय में कोरोना से भी बड़ी महामारी आ सकती है, जिसकी वजह पोलट्री फर्म्स में चिकन का मास फार्मिंग होगी। यह महामारी ‘एपोकैलिक वायरस’ के कारण फैलेगी, जो पोलट्री फर्म्स में पनप रहे रोगों के कारण मानव जाति के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

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इस तरह बचा जा सकता है

अपनी किताब में ग्रेगर आनेवाले समय की संभावित महामारी से बचने का तरीका सुझाते हुए कहते हैं कि सबसे पहले तो हमें वेजिटेरियन और वेगॉन डायट को अपनाना होगा। इसके साथ ही चिकन की फॉर्मिंग के तरीकों को बेहतर बनाना होगा। क्योंकि जिस तरह के वातावरण या माहौल में आज के समय में चिकन का प्रोडक्शन किया जा रहा है, यह माहौल जानलेवा वायरस के पनपने के लिए एकदम फ्रेंडली है।

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चिकन मिटा सकता है दुनिया की आधी जनसंख्या

ग्रेगर का कहना है कि जितनी अधिक संख्या में जानवरों को एक साथ रखा जाता है, उनमें वायरस पनपने और उनके अंदर जाकर सर्वाइव करने की संभावना भी उतनी ही बढ़ जाती है। इसलिए हम कह नहीं सकते कि जिस चिकन को हम टेस्ट के लिए और हेल्थ के लिए खा रहे हैं, उसके मीट और टिश्यूज के साथ जानलेवा वायरस भी हमारे अंदर जा रहे होंगे।

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न्यूट्रिशियनिस्ट ग्रेगर का कहना है कि बेहतर होगा चिकन के हेल्दी प्रॉडक्शन के लिए हम फर्म्स को छोटा रखें। साथ ही इसमें स्पेस अधिक हो। यानी अधिक स्पेस में कम मुर्गियों का पालन किया जाए। साथ ही हम अपनी डायट में मीट और चिकन को कम करें। नहीं तो जब तक हम मीट बेस्ड डायट खाते रहेंगे, तब तक महामारियों का दौर चलता ही रहेगा। ये महामारियां कभी इंसानों के बीच फैलेंगी तो कभी खुद जानवरों के बीच।

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