corona treatment latest updates: Dexamethasone for covid -19 treatment: Dexamethasone uses for coronavirus

Edited By Garima Singh | नवभारतटाइम्स.कॉम | Updated:

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दुनियाभर के वैज्ञानिक लगातार कोविड-19 की दवाई खोजने में लगे हैं। ऐसी दवाई या वैक्सीन जो कोरोना संक्रमण से बचने का पक्का इलाज हो। हाल की ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने पाया है कि डेक्सामेथासोन नामक दवाई कोविड के मरीजों को देने पर उनकी स्थिति में काफी तेजी से सुधार हुआ है। जो मरीज गंभीर स्थिति में थे उनमें मृत्युदर भी 35 प्रतिशत तक घट गई है।

ऐसे काम करती है यह डेक्सामेथासोन

-जब शरीर में कोरोना वायरस पहुंचता है और अपनी संख्या बढ़ाने का प्रयास करता है तो व्यक्ति शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्युनिटी और डिफेंस मकैनिज़म ऐक्टिव हो जाता है। इस दौरान बॉडी में हर समय घूमती रहने वाली इम्युनिटी सेल्स शरीर के अन्य हिस्सों में फैली इम्युनिटी सेल्स को वायरस के अटैक की सूचना देती हैं।

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-इस सूचना को पाकर बहुत तेजी से इम्युनिटी सेल्स शरीर में उस स्थान पर पहुंचने लगती हैं, जहां वायरस ने अटैक किया होता है। साथ ही हमारे शरीर के डिफेंस मकैनिज़म को यह सूचना पहुंचा दी जाती है कि वह तेज गति से इम्युन सेल्स का प्रोडक्शन बढ़ा दे। इससे अधिक मात्रा में हमारा शरीर रोग प्रतिरोधक और फाइटर सेल्स का निर्माण करने लगता है।

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कोरोना का सस्ता इलाज

-इस दौरान हमारे शरीर में साइटोकाइन्स का सीक्रेशन बढ़ जाता है। साइटोकाइन्स हमारे शरीर में मौजूद वे कैमिकल्स होते हैं, जो हमारे शरीर की इम्युनिटी सेल्स के निर्माण और उनकी क्षमता बढ़ाने में सहायता करते हैं। जब साइटोकाइन्स का सीक्रेशन बहुत अधिक मात्रा में होने लगता है तो जिस स्थान पर इम्यून सेल्स और वायरस के बीच फाइट चल रही होती है, वहां बहुत अधिक मात्रा में साइटोकाइन्स जमा होने लगता है। ताकि वायरस को मारने में इम्यून सेल्स की सहायता कर सके।

-क्योंकि कोरोना वायरस का संक्रमण हमारे शरीर में सबसे पहले गले और फेफड़ों पर ही अटैक करता है, इस कारण साइटोकाइन्स हमारे श्वसनतंत्र में अधिक मात्रा में जमा हो जाते हैं। इससे हमारे फेफड़ों और श्वांस नलियों में सूजन आ जाती है। यह सूजन आने से व्यक्ति को सांस लेने में समस्या होने लगती है। इस कारण शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लगती है। इससे दम घुटने से पेशंट की मृत्यु होने की संभावना बढ़ जाती है।

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क्यों अधिक रिलीज होते हैं साइटोकाइन्स?

-शरीर पर वायरस का अटैक होने के बाद कुछ लोगों में डिफेंस मकैनिज़म अधिक ऐक्टिव हो जाने की स्थिति में बहुत तेज स्पीड से साइटोकाइन्स रिलीज होते हैं। इस स्थिति को साइटोकाइन्स स्ट्रोम यानी तूफान भी कहा जाता है। ये साइटोकाइन्स पूरी ताकत के साथ वायरस को मारने में जुट जाते हैं। लेकिन खुद इन साइटोकाइन्स की अधिकता के कारण शरीर के अन्य अंगों पर बुरा प्रभाव पड़ता है।

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कोरोना इलाज से जुड़ी नई जानकारी

-ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने कोविड का इलाज खोजते हुए डेक्सामेथासोन को इसीलिए महत्वपूर्ण बताया है क्यों कि यह दवाई कोविड पेशंट्स के शरीर के अंदर साइटोकाइन्स का तूफान आने से रोकती है। यानी यह साइटोकाइन्स के रिलीज होने की क्षमता को नियंत्रित करने का काम करती है। ताकि फेफड़ों में सूजन आने से रोकी जा सके और शरीर को ऑक्सीजन भी मिलती रहे।

-जब शरीर को ऑक्सीजन मिलती रहती है और संतुलित मात्रा में साइटोकाइन्स रिलीज होकर वायरस को मारते रहते हैं तो पेशंट की स्थिति जल्दी बेहतर होती है। ऐसे में मरीज कोविड के संक्रमण को हराकर जल्दी ठीक हो पाता है।

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डोज और प्रभाव की जानकारी

-डेक्सामेथासोन कोरोना मरीजों को 7 से 10 दिन तक एक सीमित मात्रा में दी जा रही है। इसकी कुल डोज की संख्या और डोज की मात्रा

मरीज की स्थिति पर निर्भर होती है। लेकिन एक मरीज को यह दवाई 8 एमजी के अंदर-अंदर ही देनी होती है।

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कोविड का सस्ता इलाज मिला

-कोविड के इलाज में इस दवाई की भूमिका कारगर सिद्ध होने से हेल्थ एक्सपर्ट्स इसलिए भी खुश हैं कि इसकी डोज मरीजों की पॉकेट पर भारी नहीं पड़ेगी। अब तक कोरोना के मरीजों को ट्रीट करने में मिथाइल प्रेडिनीसोलोन दवाई दी जा रही थी। लेकिन इस दवाई का खर्च जितनी डोज में एक मरीज पर करीब 10 हजार का पड़ रहा था, वहीं डेक्सामेथासोन की उतनी डोज का खर्च 500 रुपए से भी कम का पड़ रहा है।

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