Coronavirus havoc: 66 percent of peoples employment affected, 17 percent unemployed – कोरोना का कहर: 66 फीसदी लोगों के रोजगार पर असर, 17 प्रतिशत हुए बेरोजगार

प्रतीकात्मक फोटो.

मुंबई:

कोरोना वायरस (Coronavirus) संक्रमण का असर लोगों के रोज़गार (Employment) और जेब पर पड़ा है. यह बात अब एक सर्वे से साफ होती दिख रहा है. सर्वे के अनुसार 66 फीसदी लोगों के रोज़गार पर कोरोना का असर पड़ा, जिसमें से 17 फीसदी लोग बेरोजगार (Unemployment) भी हुए. प्रजा फाउंडेशन नाम की संस्था की ओर से किए गए सर्वेक्षण (Survey) में सामने आए नतीजों से यह साफ हुआ कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण बड़ी संख्या में लोगों के रोजगार पर असर पड़ा. इसके अलावा बेरोजगारी भी बढ़ी.

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डिलीवरी ब्वॉय का काम करने वाले संकेत पवार ने कोविड में नौकरी चले जाने के बाद अब लोगों से हज़ारों रुपये उधार लेकर यह कपड़े की दुकान शुरू की है. कई दिनों तक नौकरी खोजने के बावजूद कोई नौकरी नहीं मिलने के बाद उन्होंने दुकान खोलने का फैसला किया. कमाई पहले की तुलना में कम है, लेकिन उम्मीद है कि धीरे-धीरे चीज़ें सुधरेंगी.

संकेत पवार ने कहा कि ”ऐसे बहुत सारे मेरे दोस्त भी हैं जिन्हें नौकरी से निकाला गया और घर  चलाने में दिक्कत हो रही है. उनमें से एक मैं हूं, जॉब नहीं मिल रहा था तो मैंने अब यह बिज़नेस शुरू किया है.” 

कोरोना का असर स्वप्निल तांबे की जेब पर भी पड़ा है. पहले एक निजी अस्पताल में वार्ड ब्वॉय का काम करते थे, कॉन्ट्रैक्ट खत्म होने पर काम खत्म हो गया. अब वे कोविड सेंटर में काम कर रहे हैं, लेकिन पहले की तुलना में पैसे कम हैं. परिवार में 6 लोग इन पर निर्भर हैं. इन्हें नहीं पता कि घर कैसे चलाएं. स्वप्निल तांबे ने कहा कि ”पहले सैलरी में घर चलता था, सब खर्च निकल जाता था. अब तो न खुद का खर्च निकाल पा रहे हैं ना घर का खर्च. लेकिन लॉकडाउन के बाद कहीं नौकरी नहीं है. ऊपर से ट्रेन भी बंद है तो आने-जाने में दिक्कत है, उसमें भी खर्च है.”

प्रजा फाउंडेशन की ओर से हाल ही में किए गए एक सर्वे में पाया गया है कि कुल 66 फीसदी लोगों की जेब पर कोरोना का असर पड़ा है. 28 फीसदी लोगों के वेतन में कटौती की गई, 25 फीसदी लोगों ने बिना वेतन के काम किया और 17 फीसदी लोगों को नौकरी से हाथ धोना पड़ा. दिसंबर 2020 में प्रजा फाउंडेशन ने यह सर्वे किया जिसमें 2087 परिवारों से उन्होंने बात की.

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प्रजा फाउंडेशन की जेनिफर स्पेंसर ने कहा कि ”हम देखते हैं कि सबसे ज़्यादा प्रभाव निम्न वर्ग के कर्मचारियों पर पड़ा है. 44 फीसदी कर्मचारियों ने कहा कि उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया था, जबकि पूरे respondents में से 23 फीसदी लोग शहर छोड़कर चले गए थे, जिसमें से 57 फीसदी लोगों का कहना है कि वो इसलिए गए थे, क्योंकि उनकी नौकरियां चली गई थीं.”


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