COVID-19: अब कैदियों की रिहाई में नहीं होगी मुश्किल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत allahabad high court gives big relief to prisoner on bail due to coronavirus upsd upns | uttar-pradesh – News in Hindi

COVID-19: अब कैदियों की रिहाई में नहीं होगी मुश्किल, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत

अब कैदियों की रिहाई में नहीं होगी मुश्किल (फाइल फोटो)

कोरोना संक्रमण के चलते सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक रिट याचिका का सुप्रीम कोर्ट ने 23 मार्च को स्वतः संज्ञान (Suo Moto cognizance) लिया था.

प्रयागराज. इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने एक महत्वपूर्ण आदेश में ऐसे कैदियों को बड़ी राहत दी है. जो कि कोरोना महामारी (Coronavirus) के चलते जमानत न भरने के कारण जेलों से रिहा नहीं हो सके हैं. कोर्ट ने ऐसे कैदियों को रिहा होने के बाद एक माह के अंदर उन्हें अपनी जमानत भरने की भी मोहलत दी है. गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण के चलते सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक रिट याचिका का सुप्रीम कोर्ट ने 23 मार्च को स्वतः संज्ञान (Suo Moto cognizance) लिया था और जेलों में भीड़-भाड़ कम करने के लिए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सभी राज्यों को एक कमेटी बनाकर 7 साल से कम सजा वाले कैदियों, बंदियों को ज़मानत और पैरोल पर छोड़ने के निर्देश दिए थे. लेकिन यूपी की जेलों में कई ऐसे कैदी हैं जो कि जमानत न भर पाने के चलते रिहा नहीं हो सके हैं.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेलों में बंद ऐसे कैदियों को भी रिहा करने का आदेश दिया है जो कि अदालत के जमानत पर रिहा करने के आदेश के बावजूद जमानत न भरने के कारण अभी तक रिहा नहीं हुए हैं. कोर्ट ने कहा है कि जेल से रिहा होने वाले कैदी जेल से रिहा होने के बाद एक माह के अंदर अपनी जमानत भर सकते हैं. कोर्ट ने बांड पत्र में ऐसे कैदियों से इस बाबत शपथ पत्र भी लेने का निर्देश दिया है. चीफ जस्टिस गोविंद माथुर और जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका कायम कर मामले की सुनवाई करते हुए ये आदेश पारित किया है.

हाईकोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 226 एवं 227 के अधिकारों का प्रयोग करते हुए कहा है कि 15 मार्च 2020 के बाद जमानत पर रिहा हुए लोग यदि जमानत न भरने के कारण जेल से रिहा नहीं हो पाए हैं, तो उन्हें व्यक्तिगत बांड और आश्वासन लेकर रिहा किया जाए. रिहा होने के एक माह के भीतर वे जमानत भर सकते हैं. कोर्ट ने आदेश की प्रति संबंधित जिला अदालतों एवं अधिकरणों सहित प्रदेश के महाधिवक्ता, भारत सरकार के अपर सालिसीटर जनरल एवं सहायक सॉलिसिटर जनरल, राज्य लोक अभियोजक और उत्तर प्रदेश बार काउंसिल के अध्यक्ष को भेजने का आदेश दिया है.

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First published: April 6, 2020, 8:26 PM IST




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