covid risk factor: before covid 4th wave know who is more risk of coronavirus – COVID 4th wave: जल्दी से घरों में दुबक जाएं ये 5 तरह के लोग, ऐसे लोगों को जल्दी चपेट में लेता है कोरोना

कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus pandemic) अभी खत्म होती नहीं दिख रही है। जब सब यह सोचने लगे कि कोरोना खत्म हो रहा है, तभी मामलों में अचानक वृद्धि ने सबको चिंता में डाल दिया है। पिछले महीने कोरोना से जुड़े लगभग सभी प्रतिबंध हट गए थे लेकिन अब एक बार फिर कई शहरों में नियमों को दोबारा लागू कर दिया गया है। इस बार ओमीक्रोन (Omicron) और उसके सबवेरिएंट कहर बरपा रहे हैं।

कोरोना घातक वायरस है और यह टीके लगवा चुके लोगों को भी नहीं छोड़ रहा है। बेशक टीके लगवाने लोगों को कोरोना से होने वाली गंभीर बीमारी का जोखिम कम होता है लेकिन इससे पूरी तरह बचाव नहीं हो सकता। इससे हटकर कोरोना का उन लोगों को ज्यादा खतरा होता है, जो पहले से किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित हैं या जिनका इम्यूनिटी सिस्टम कमजोर है।

वास्तव में कोरोना किसी के लिए हल्का और किसी के लिए गंभीर है। CDC का मानना है कि कोरोना के सभी मामलों में 30 फीसदी लोगों में कोरोना के लक्षण नहीं दिखते हैं। कोरोना के आम लक्षणों (Covid-19 common symptoms) में बुखार, सूखी खांसी, थकान, सिरदर्द, गले में खराश, नाक बहना, शरीर में दर्द, गंध और स्वाद की कमी, जठरांत्र संबंधी समस्याएं और त्वचा की समस्या शामिल हैं। चलिए जानते हैं कोरोना का ज्यादा जोखिम किन लोगों को है।

बुजुर्गों को कोरोना का अधिक खतरा

प्रमुख स्वास्थ्य संगठनों के अनुसार, 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में अक्सर कोरोना अधिक गंभीर होता है। ऐसा इसलिए पुरानी बीमारियों के कारण हो सकता है। इसके अलावा, 60 वर्ष और उससे अधिक आयु के लोगों में कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली का होना भी इसका एक बड़ा कारण है।

पुरानी बीमारी से पीड़ित लोगों को

आपकी उम्र चाहे जो भी हो, यदि आप किसी पहले से मौजूद किसी स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित हैं, तो आपको कोरोना का अधिक जोखिम हो सकता है। कई रोग जैसे कैंसर, क्रोनिक किडनी रोग, पुरानी लीवर की बीमारी, फेफड़े के रोग जैसे क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज, पल्मोनरी फाइब्रोसिस, पल्मोनरी एम्बोलिज्म और अस्थमा, डायबिटीज और दिल के रोग गंभीर कोविड संक्रमण के लिए जिम्मेदार हैं।

दिल के रोगियों का कोरोना का जोखिम

अध्ययन से पता चलता है कि कोरोना हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकता है। बेशक कोरोना एक सांस की बीमारी है लेकिन अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (AHA) का मानना है कि यह वायरस दिल के दौरे का खतरा बढ़ा सकती हैं।

इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड लोगों को भी खतरा

इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड वाले लोगों की प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती है जिससे उनका शरीर वायरल संक्रमणों का जवाब नहीं दे पाता है। विभिन्न रोग और चिकित्सा उपचार प्रतिरक्षा को कमजोर कर सकते हैं। इससे आपको संक्रमण होने और गंभीर बीमारियां होने का खतरा हो सकता है।

मोटापे से पीड़ित लोगों को कोरोना का अधिक खतरा

अध्ययनों ने मोटापे को गंभीर कोरोना बीमारी के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक माना है। ऐसा इसलिए है क्योंकि मोटे और अधिक वजन होने से व्यक्ति की प्रतिरक्षा कम होती है जिससे शरीर के लिए घातक वायरस से लड़ना मुश्किल हो जाता है।

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। यह किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

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