दंतेवाड़ा के बैलाडीला पहाड़ी के नीचे बसे गांवों के ग्रामीणों को मिला राशन कार्ड.
दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला पहाड़ियों के नीचे बसे गांवों में रहने वालों को मिला राशन कार्ड. इन ग्रामीणों के आधार कार्ड बनाने और बैंक खाता खोलने का भी कलेक्टर ने दिया आदेश. नजदीकी कस्बे से गांवों को जोड़ने के लिए सड़क बनाने की योजना पर जल्द काम शुरू होगा.
बैंगपाल और बड्डेपल्ली गांव के इन ग्रामीणों को राशन कार्ड मिलने के बाद अब आधार कार्ड देने की तैयारी चल रही है. जिले के कलेक्टर दीपक सोनी की पहल के बाद अब इनके बैंक खाते भी खुलेंगे. नक्सल प्रभावित क्षेत्र होने के कारण अब तक ये ग्रामीण पहचान से वंचित थे. हैरानी की बात यह है कि आजाद भारत में बैलाडीला पहाड़ी के नीचे के करीब आधा दर्जन गांवों तक प्रशासन पहुंच नहीं पाया था. मगर देर से ही सही, प्रशासन ने इन गांवों में अब दस्तक दे दी है.
10 किमी पैदल करना पड़ता था सफर
मालूम हो कि गुमियापाल पंचायत के आश्रित ग्राम बेंगपाल, बड्डेपल्ली, लोहा गांव तक संपर्क का कोई साधन नहीं था. अब तक ये ग्रामीण करीब 10 किलोमीटर जंगल-पहाड़ी पैदल सफर कर जरूरत के समान लेने किरंदुल पहुंचते थे. जिसकी वजह से सरकार की योजनाएं इन गांवों तक पहुंच ही नहीं पाती थीं. इन गांवों में रहने वाले लोगों के पास न तो वोटर आईडी थी और न ही राशन कार्ड. अब जाकर प्रशासन ने इन गांवों तक जाने के लिए संपर्क मार्ग बनाने की योजना पर काम शुरू किया है. एसडीएम प्रकाश भारद्वाज ने बताया कि जल्द ही इन गांव तक पहुंच पथ बन जाएगा.
पहचान मिलने से खुश हुए ग्रामीण
बेलाडीला पहाड़ी के इन गांवों के लोगों को पहचान दिलाने के बाद एसडीएम ने ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठकर खाना भी खाया. गांव वाले अफसर की सादगी की तारीफ करते नजर आए. बेंगपाल के पूर्व उप सरपंच भीमा ने बताया कि अपनी पहचान के लिए कोई कागज अब तक हमारे पास नहीं था. आज राशन कार्ड मिला है, आधार कार्ड भी बन रहा है, इससे बहुत खुशी हो रही है. गुमियापाल के राजू भास्कर ने भी प्रशासन के इस पहल की तारीफ की.