Delhi Minority Commission Chairman Zafarul Islam Khan sedition case fir Delhi police

जफरुल इस्लाम दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हैं. (फाइल फोटो)

खास बातें

  • दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हैं जफरुल इस्लाम
  • जफरुल इस्लाम के खिलाफ दर्ज है देशद्रोह का मामला
  • दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आज पूछताछ के लिए बुलाया

नई दिल्ली:

दिल्ली अल्पसंख्यक आयोग (Delhi Minority Commission) के अध्यक्ष जफरुल इस्लाम खान (Zafarul Islam Khan) के खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किया गया है. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आज (सोमवार) जफरुल इस्लाम को नोटिस भेजकर पूछताछ में शामिल होने बुलाया है. CRPC 160 का नोटिस भेजकर पूछताछ में शामिल होने के लिए बुलाया गया है. जफरुल इस्लाम को स्पेशल सेल के अधिकारी ने यह नोटिस दिया है. जिसके बाद अगले दो दिन के अंदर उन्हें स्पेशल सेल की पूछताछ का सामना करना पड़ेगा. हाईकोर्ट के आदेश के बाद पुलिस को जफरुल इस्लाम से पूछताछ करने की इजाजत मिली है.

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हाईकोर्ट ने जफरुल इस्लाम की गिरफ्तारी पर 22 जून तक रोक लगा रखी है, पर दिल्ली पुलिस को पूछताछ की इजाजत दे चुकी है, जिसको लेकर ही आज जफरुल इस्लाम को ये नोटिस भेजा गया है. जफरुल इस्लाम पर आरोप था कि उन्होंने विवादित और देश तोड़ने वाले बयान सोशल मीडिया पर पोस्ट किए थे. जिसके बाद स्पेशल सेल ने उनके खिलाफ देशद्रोह और अन्य कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था.

गौरतलब है कि दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ ने दो मई को एक शिकायत के आधार पर खान के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए और 153ए के तहत राजद्रोह व विभिन्न समुदायों के बीच धर्म, नस्ल, जन्म स्थान, आवास और भाषा के आधार पर नफरत फैलाने के अपराध के सिलसिले में मामला दर्ज किया था.

खान ने अग्रिम जमानत दिए जाने का अनुरोध करते हुए कहा था कि वह एक लोक सेवक व 72 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक हैं. उन्हें दिल की बीमारी और हाइपरटेंशन भी है. ऐसे में उन्हें कोविड-19 होने का खतरा है, जिससे उनकी उम्र और स्वास्थ्य स्थिति वाले व्यक्ति के लिए घातक परिणाम हो सकते हैं.

उन्होंने याचिका में कहा, “ऐसी परिस्थितियों में उन्हें इस ओछे और बिना आधार वाले मामले में गिरफ्तारी और दंडात्मक कार्रवाई से संरक्षण दिए जाने की तत्काल आवश्यकता है, जिससे उनकी स्वतंत्रता की सुरक्षा हो सके क्योंकि ऐसा न होने पर उनके जीवन के अधिकार पर अपरिवर्तनीय असर होगा.”

याचिका में यह भी अनुरोध किया गया कि पुलिस को यह निर्देश भी दिया जाए कि उन्हें गिरफ्तार करने की स्थिति में, उन्हें तत्काल जमानत पर रिहा किया जाए और उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए. यह निर्देश देने की भी मांग की गई कि खान का लैपटॉप और मोबाइल फोन जब्त न किया जाए. 

याचिका में दावा किया गया कि खान ने कोई अपराध नहीं किया है और उनके खिलाफ प्राथमिकी दुर्भावनापूर्ण इरादे से उन्हें परेशान और डराने के उद्देश्य से दर्ज कराई गई है.


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