कोरोना काल के बाद जब स्कूल खुलेंगे, तो किस तरह की तस्वीर होगी? चीन में फिर से स्कूल खुलना शुरू हो चुके हैं. इस तस्वीर को देखकर आपको इस बात का अंदाज़ा हो जाएगा, कि कोरोना काल के बाद भविष्य आसान नहीं है? ये चीन के Hangzhou (हांगचो) शहर के एक प्राइमरी स्कूल की तस्वीर है. यहां Lockdown के बाद बच्चे पहली बार क्लासरूम में लौटे हैं. अगर आप तस्वीरों को ध्यान से देखेंगे तो क्लासरूम में बच्चे एक खास तरीके की हैट पहन कर बैठे हैं, जिनके किनारे काफी लंबे हैं. बच्चों को ये टोपियां इसलिए पहनाई गई है, जिससे स्कूल और क्लासरूम में बच्चों के बीच दूरी बनी रहे. इन्हें 1 मीटर हैट कहा जा रहा है, जिनके ज़रिए स्कूल में बच्चों के बीच सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करवाया जा सके, और इससे बच्चे भी एक दूसरे से..एक मीटर की दूरी पर रहना ना भूलें.
चीन में खासतौर पर प्राइमरी स्कूल खुलने पर ये हर तरीके से सुनिश्चित किया जा रहा है कि स्कूल आने पर भी बच्चों को वायरस संक्रमण का कोई खतरा ना हो. स्कूल आने पर बच्चों के लिए फेस मास्क पहनना ज़रूरी है. स्कूल में बच्चों के लिए साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जा रहा है. नियमित अंतराल पर बच्चों का तापमान किया जाता है. स्कूल में बच्चों को एक दूसरे को छूने की इजाजत नहीं है. दूरी बनाए रखने के लिए ऐसी स्पेशल हैट्स दी गई हैं, जिन पर ये भी ध्यान रखा जा रहा है कि बच्चे इसे तोड़ ना दें.
खास किस्म की टोपियों का इतिहास
चीन में इस तरह की टोपियों का एक इतिहास भी है. आज से करीब एक हज़ार साल पहले चीन में सोंग साम्राज्य के सम्राट और उनके दरबारी इस तरह की हैट पहनते थे. इस वंश के पहले सम्राट Taizu (ताईज़ू) ने इस तरह की खास Hats को इसलिए design किया था, जिससे बैठक में उनके दरबारी एक दूसरे से कानाफूसी ना कर सकें. इसे social distancing के लिए इतिहास का पहला प्रयोग भी कह सकते हैं.
चीन में कई जगहों पर जनवरी से स्कूल और कॉलेज बंद थे, लेकिन अब वहां कोरोना का खतरा कम होने पर धीरे धीरे स्कूल और कॉलेज खोले जा रहे हैं. बीजिंग और शंघाई जैसे बड़े शहरों में बड़ी कक्षाओं के छात्रों के लिए स्कूल खुल चुके हैं.
शंघाई में Middle और High School के छात्रों ने फिर से स्कूल जाना शुरू कर दिया है. बीजिंग में उन्हीं छात्रों को स्कूल आने की मंजूरी मिल गई है, जिन्हें जुलाई में होने वाले यूनिवर्सिटी एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करना है. ये चीन में बहुत मुश्किल एग्जाम माना जाता है. लेकिन इस समय तो सबकी परीक्षा कोरोना वायरस ले रहा है. चीन में स्कूल तो फिर से शुरू हो गए हैं, लेकिन कोरोना वायरस की Second Wave के खतरे के बीच सभी सतर्क हैं. स्कूल में आने वाले छात्रों को मास्क पहनना अनिवार्य है.
उन्हें Social Distancing और स्वच्छता के नियमों का पूरा पालन करना होता है. स्कूल में एंट्री के वक्त और नियमित अंतराल पर छात्रों का तापमान चेक होता है. खतरे को कम करने के लिए तकनीक का भी अच्छा उपयोग हो रहा है. स्कूल के गेट पर छात्रों को अपने मोबाइल फोन में विशेष App पर रिसीव हुए ग्रीन कोड को दिखाना होता है. जिसके बाद ही उन्हें स्कूल में एंट्री और Class में बैठने की इजाजत मिलती है. इसके जरिए पता चलता है कि उस छात्र से कोरोना संक्रमण का खतरा है या नहीं.
चीन में कोरोना के खतरे पर नज़र रखने और संपर्क की जांच के लिए इस तरह का सिस्टम बनाया गया है कि किसी सार्वजनिक जगह पर जाने में, उदाहरण के तौर पर बस या ट्रेन में यात्रा करने या स्कूल जाने पर एंट्री गेट पर ही आपको मोबाइल फोन से एक QR Code स्कैन करना होता है, स्कैन करने पर अगर मोबाइल पर Green Code आता है, तो इसका मतलब कि आप स्वस्थ हैं और आपको एंट्री मिल जाएगी. अगर Orange कोड आता है, तो इसका मतलब है कि उस व्यक्ति को quarantine में रहना होगा. अगर red code आता है, तो इसका मतलब है कि या तो उस व्यक्ति को वायरस का संक्रमण है या फिर वो किसी कोरोना मरीज के संपर्क में आया है.
चीन के बाकी शहरों की तरह अब वुहान ने भी स्कूल खोलने की तैयारी कर ली है. यही से कोरोना वायरस सबसे पहले फैला था. वुहान में 6 मई से स्कूल खुल जाएंगे. Unesco के मुताबिक इस वक्त दुनिया के करीब 90 प्रतिशत छात्र यानी करीब 130 करोड़ छात्र स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. भारत में Lockdown का छठा हफ्ता है. सबसे ज़्यादा बच्चे ही पूछते हैं कि Lockdown कब खत्म होगा, कब स्कूल खुलेंगे. लेकिन अब सवाल तो ये भी है कि कोरोना काल के बाद स्कूल खुलेंगे तो उनका स्वरूप कैसा होगा. किस तरह से Social Distancing का पालन करते हुए पढ़ाई होगी. किस तरह से वायरस के खतरे और डर के बीच Classes चलेंगी.


