Facebook employee who protested inaction on Trump’s inflammatory posts says he was fired | मार्क जुकरबर्ग की खामोशी पर सवाल उठाने वाले इंजीनियर को Facebook ने नौकरी से निकाला

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के भड़काऊ पोस्ट पर कार्रवाई नहीं करने को लेकर फेसबुक (Facebook) के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग (Mark Zuckerberg) की आलोचना करने वाले कर्मचारी को फेसबुक ने निकाल दिया है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार यूजर इंटरफ़ेस इंजीनियर ब्रैंडन डेल ने दावा किया है कि उन्हें जुकरबर्ग की आलोचना करने पर नौकरी से निकाला गया है.  

ब्रैंडन डेल (Brandon Dail) के सोशल मीडिया प्रोफाइल के मुताबिक वह सिएटल में बतौर यूजर इंटरफ़ेस इंजीनियर फेसबुक से जुड़े हुए थे. उन्होंने इस संबंध में कई ट्वीट किये हैं. अपने एक ट्वीट में उन्होंने लिखा है, ‘पारदर्शिता के हित में, मुझे ट्विटर पर एक कर्मचारी की निष्क्रियता पर सवाल उठाने के लिए जाने को कहा गया है. मैंने जो कहा मैं उस पर अडिग हूं. उन्होंने मुझे नौकरी छोड़ने का मौका नहीं दिया’. 

डेल ही नहीं उनकी टीम के छह अन्य इंजीनियरों सहित दर्जनों कर्मचारियों ने मार्क जुकरबर्ग की खामोशी पर सार्वजानिक तौर पर नाराजगी जताई थी. जिसके बाद उन्हें सफाई पेश करने के लिए सभी कर्मचारियों को वर्चुअली संबोधित करना पड़ा. डेल का कहना है कि उन्हें गलत बात के खिलाफ आवाज उठाने के चलते निकाला गया है. उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा है कि जानबूझकर बयान नहीं देना भी राजनीति है. 

गौरतलब है कि उन्‍होंने राष्ट्रपति ट्रंप के पोस्ट को नस्लीय करार दिया था. उन्होंने जॉर्ज फ्लॉयड की हत्या के बाद अमेरिका में भड़के दंगों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा था, ‘जब लूट शुरू हुई, तो शूटिंग शुरू हुई.’ ट्विटर ने ट्रंप के इसी पोस्ट को हिंसा का महिमामंडन करने वाला करार देते हुए वार्निंग लेबल लगा दिया था, लेकिन मार्क जुकरबर्ग ने ऐसा कुछ नहीं किया.

सफाई देते वक्त भी उन्होंने अपने फैसले का बचाव किया. इस दौरान उन्‍होंने ट्वीट किया था कि यह आज स्पष्ट है कि नेतृत्व हमारे साथ खड़े होने से इनकार करता है. डेल ने हाल ही में पुलिस की कार्रवाई में घायल प्रदर्शनकारी मार्टिन गोगिनो (75) के मामले में भी फेसबुक और ट्विटर की निष्क्रियता पर भी सवाल उठाये थे. इस विषय में उन्होंने कहा था कि मार्टिन गुगिनो पर ट्रंप की टिप्पणी घृणित है और फेसबुक की उत्पीड़न-विरोधी नीति का स्पष्ट उल्लंघन है. यह फिर से बेहद निराशाजनक है कि हमने और ट्विटर ने उसे नहीं हटाया.

 




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