Farmers organization split over decision to open highway from Delhi – दिल्ली से लगा हाईवे खोलने के फैसले को लेकर किसान संगठन में दोफाड़

BKU Bhanu faction : दिल्ली-जयपुर हाईवे के एक हिस्से को किसानों ने ब्लाक कर दिया (फाइल) 

नई दिल्ली:

किसान आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रहे भारतीय किसान यूनियन भानु गुट (Bharatiya Kisan Union Bhanu faction) में रविवार को तीखे मतभेद उभर कर सामने आ गए. नोएडा से दिल्ली को जाने वाले चिल्ला बॉर्डर खोलने को लेकर भानु गुट में दो फाड़ हो गए. नोएडा से दिल्ली बॉर्डर (Delhi-Noida Border) केवल एकमात्र विकल्प रह गया था, क्योंकि राजस्थान से किसानों को दिल्ली आने से रोकने के लिए दिल्ली-जयपुर बॉर्डर को बंद कर दिया गया था. दिल्ली-यूपी के बीच चिल्ला बॉर्डर को किसानों ने 14 दिन से बंद कर रखा था. भाकियू (BKU) भानु गुट के अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath singh) से मुलाकात के बाद रास्ता खोलने का निर्णय लिया. 

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राष्ट्रीय अध्यक्ष ने आंदोलनरत किसानों के साथ चिल्ला बार्डर (Chilla Border) पर रास्ता खोला तो संगठन के प्रदेश अध्यक्ष ने अनशन शुरू कर दिया है. संगठन के राष्ट्रीय महासचिव और प्रवक्ता ने इस्तीफा दे दिया.  भाकियू (भानु गुट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह का यह फैसला संगठन के प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप को रास नहीं आया और उन्होंने अपने ही अध्यक्ष के सामने मोर्चा खोल दिया। योगेश प्रताप रविवार की सुबह आमरण अनशन पर बैठ गए। मौके पर ही पूजा पाठ भी शुरू हो गया. बातचीत में योगेश प्रताप ने कहा कि अगर नए कृषि कानून (Farm Laws) को वापस नहीं लिया गया तो यहां से वह मर कर ही उठेंगे. जबकि बीकेयू (भानु) के राष्ट्रीय महासचिव महेंद्र सिंह चौरोली और राष्ट्रीय प्रवक्ता सतीश चौधरी ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के निर्णय से आहत हो इसे किसानो कौम के खिलाफ गद्दारी मानते हुए इस्तीफ़ा दे दिया है,

नए कृषि कानूनों के खिलाफ 18 दिनों से आंदोलन कर रहे किसान संगठनों के बीच अब दरार दिखने लगी है. नोएडा-दिल्ली बार्डर पर बीते 12 दिनों से सड़क बंद कर धरने पर बैठे भारतीय किसान यूनियन (भानु) में आंतरिक कलह बेपर्दा हो गया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर भानु प्रताप सिंह के रास्ता खोलने के फैसले के खिलाफ संगठन के प्रदेश अध्यक्ष योगेश प्रताप खड़े हो गए। उन्होंने न सिर्फ रास्ता खोलने का विरोध किया, बल्कि वे आमरण अनशन पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि अब वे मर कर ही उठेंगे। वही बीकेयू (भानु) के दो वरिष्ठ पदाधिकारियों ने फैसले आहत हो कर इसे किसानो कौम के खिलाफ गद्दारी मानते हुए इस्तीफ़ा दे दिया है  


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