former engineer revealed that Apple helped the US to make top-secret iPod |टॉप सीक्रेट iPod बनाने में Apple ने की थी अमेरिका की मदद, राज से उठा पर्दा!

नई दिल्‍ली: एप्पल के एक पूर्व इंजीनियर डेविड शयेर (David Shayer) की एक ब्लॉग पोस्ट अचानक से चर्चा में आ गई है, इस पोस्ट में उन्‍होंने दावा किया है कि एक बार उनको कहा गया था कि अमेरिकी सरकार के ऊर्जा विभाग के लिए एक टॉप सीक्रेट iPod बनाना है. शयेर उन शुरुआती इंजीनियर्स की टीम में से हैं, जिनको पहले आईपॉड पर काम करने के लिए जॉब दी गई थी. उनके मुताबिक जब 2005 में एक दिन वो अपनी डेस्क पर बैठे हुए थे तो Apple में उनके बॉस ने उनको कंपनी की तरफ से एक ‘स्पेशल असाइनमेंट’ करने के लिए कहा था.

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शयेर ने दावा किया है कि उनके अलावा एप्पल में इस प्रोजेक्ट के बारे में केवल दो ही लोगों को जानकारी थी, एक आईपॉड डिवीजन के वाइस प्रेसीडेंट को और दूसरे हार्डवेयर के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट को. उनके मुताबिक, ये दोनों लोग अब कंपनी छोड़ चुके हैं.

शयेर के मुताबिक वो अमेरिकी डिफेंस कॉन्ट्रेक्टर बेशल के दो इंजीनियर्स से मिले थे और उन्‍हें बताया गया था कि आईपॉड वही लोग बनाएंगे और शयेर को केवल काम में उनकी मदद करनी है. आईपॉड को वैसे ही दिखना और काम करना था, जैसे कि आम आईपॉड करता है, लेकिन उसके अंदर एक स्पेशल हार्डवेयर डाला जाना था, जो डाटा रिकॉर्ड कर सकता हो लेकिन उसकी जानकारी यूजर को न हो. 

ये प्रोजेक्ट उस अवधारणा के विरुद्ध था, जिसको लेकर कंपनी एफबीआई और डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस से पिछले कई साल से टकराव मोड में है क्योंकि उसने आईफोन में इस तरह का बैकडोर लगाने से मना कर दिया था. हालांकि शयेर ने ये भी कहा है कि उसको कभी नहीं पता चल पाया कि बेशल के वो दोनों इंजीनियर्स उस सीक्रेट आईपॉड में किस तरह का हार्डवेयर लगाना चाहते थे.

हालांकि उसने अपनी ब्लॉग पोस्ट में लिखा है कि उन्‍होंने नोट किया था कि वो शायद रेडियोएक्टिविटी नापने के लिए ‘स्टील्थ गीगर काउंटर’ बना रहे थे. उन्‍होंने यह भी लिखा है कि इसके जरिये, ‘आप पूरे शहर में आराम से घूमते हुए, म्यूजिक सुनते हुए रेडियोएक्टिविटी के सबूत ढूंढ सकते हैं, चुराए गए या तस्करी कर लाए गए यूरेनियम को पकड़ सकते हैं, या किसी परमाणु बम डेवलपमेंट प्रोग्राम के सबूत भी ढूंढ सकते हैं और इस बात का भी कोई चांस नहीं है कि पब्लिक या मीडिया को जरा भी पता लगेगा कि आप वाकई में क्या कर रहे हैं या क्या हो रहा है.’   




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