-बाजार में मिलनेवाली ग्रीन-टी कई अलग-अलग पैकिंग्स और फॉर्म्स में मिलती है। आप इन्हें अपनी सुविधा और पसंद के हिसाब से खरीदते हैं। लेकिन इस बारे में कम ही लोग जानते हैं कि ग्रीन-टी की सिर्फ पैकेजिंग अलग-अलग तरह से नहीं होती है। बल्कि ग्रीन-टी भी एक से अधिक प्रकार की होती है।
-पूरी दुनिया में जिस ग्रीन-टी का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है, उसका टेक्निकल नाम सेन्चा है। इसे तैयार करते समय वही सामान्य प्रक्रिया अपनाई जाती है, जो अपने देश में आसाम और दार्जिलिंग में चाय तैयार करने के लिए अपनाते हैं।
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-चाय की पत्तियों को सुखाने के लिए धूप और भाप का उपयोग किया जाता है। जरूरी प्रक्रियाओं के बाद 5 अलग-अलग तरह की पैकेजिंग के साथ इसे मार्केट में उपलब्ध कराया जाता है। इनमें, स्वीटनर ग्रीन-टी, टी-बैग, ग्रीन लीफ, ग्रीन-टी पाउडर और ग्रीन-टी सप्लिमेंट्स के रूप में उपलब्ध कराया जाता है।
ग्रीन-टी के प्रकार और पीने का सही तरीका
ग्रीन-टी पीने का सही समय
-अगर आपको लगता है कि दिन की शुरुआत ग्रीन-टी के साथ करना लाभकारी होता है तो आप पूरी तरह सही नहीं हैं। आयुर्वेद के अनुसार, ग्रीन-टी आपके लिए सुबह की पहली ड्रिंक या नाश्ते का हिस्सा नहीं होनी चाहिए।
-बल्कि नाश्ता करने के एक घंटे बाद या लंच के कम से कम 1 घंटे बाद आप ग्रीन-टी का सेवन करें। यह आपके शरीर में जमा हुए फैट को तोड़ने का काम करेगी। साथ ही पाचनतंत्र को गति देने का काम भी करेगी।
-अन्य चाय की तरह ग्रीन-टी में भी कैफीन होता है, जो आपके शरीर को ऐक्टिव रखने में सहायता करता है। जब भी एक्सर्साइज करनी हो या वॉक पर जाना हो, उससे आधा घंटा पहले ग्रीन-टी का सेवन करने से आपको अधिक लाभ होगा।
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