संकट मोचन हनुमान मंदिर का फाइल फोटो.
लगातार दूसरा साल है, जब धार्मिक आयोजन ठप पड़े हैं और पहले की तरह भक्तों का तांता मंदिरों में नहीं लग पा रहा है. अपनी आस्था और श्रद्धा को ज़ाहिर करने के लिए भक्त घरों पर ही रहने पर मजबूर हैं.
बता दें कि इससे पहले हनुमान जयंती के अवसर पर राज्य और नगर में वर्षों से भव्य शोभायात्रा और अन्य धार्मिक आयोजन महत्वपूर्ण ढंग से होते रहे हैं. लेकिन इस बार लगातार दूसरे साल कोरोना के संकट के कारण यह मुमकिन नहीं हो सका है.
मंदिरों में फीकी है रंगत
ज़्यादातर भक्त घरों में ही पूजा आदि कर रहे हैं, लेकिन कुछ भक्त मंदिरों में भी पहुंचते हुए देखे गए. कोरोना महामारी के चलते कोविड-19 गाइडलाइनों के चलते मंदिरों में भक्तों की नो एंट्री का नियम होने के कारण मंदिरों में सिर्फ पुजारी ही पूजा पाठ कर रहे हैं.

हनुमान जयंती पर इस साल शोभायात्रा का आयोजन नहीं हुआ.
भक्तों के लिए संकट मोचन के दरबार बंद हैं तो भक्तों का विश्वास है कि जल्दी से जल्दी संकटमोचन की कृपा से कोरोना का संकट समाप्त होगा और पहले के सालों की तरह फिर शोभायात्रा व अन्य आयोजनों की धूम होगी.
नियमों का पालन करने की अपील
हनुमान जयंती के दिन मंदिरों में भक्तों की नो एंट्री है. मंदिरों व देवालयों आदि में सिर्फ पुजारी और ट्रस्ट समिति के गिनती के लोग ही पूजा पाठ कार्यक्रमों में शामिल हैं. बताया गया है कि इनके द्वारा संकट मोचन का पूजा पाठ और विशेष प्रार्थना आदि की जा रही है.
मंदिर से जुड़े लोगों ने संकट के समय में लोगों से धीरज रखने और घर से ही भगवान के प्रति आस्था को बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि सभी लोग नियमों का पालन करें और विश्वास रखें कि जल्दी सब पहले की तरह सामान्य हो जाएगा.