दतिया। दतिया जिले के सिमरिया ग्राम में ग्राम पंचायत की लापरवाही के कारण एक वृद्ध महिला के अंतिम संस्कार में ढाई से तीन घंटे की देरी हुई। श्मशान घाट तक शव ले जाने के लिए रास्ता उपलब्ध नहीं था। इससे नाराज परिजनों ने ग्राम पंचायत भवन के सामने ही अंतिम संस्कार करने का निर्णय ले लिया।सूचना मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया।रास्ता नहीं मिलने से रुकी अंतिम यात्राजानकारी के अनुसार, गांव में वृद्ध महिला की मृत्यु होने के बाद परिजन अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटे। जब अंतिम यात्रा श्मशान घाट की ओर ले जाने की बारी आई तो वहां तक पहुंचने का रास्ता नहीं मिला। परिजनों को करीब ढाई से तीन घंटे तक इंतजार करना पड़ा। इस दौरान रास्ते की व्यवस्था नहीं हो सकी।पंचायत भवन के सामने अंतिम संस्कार का फैसलालंबे इंतजार के बाद भी जब रास्ते का इंतजाम नहीं हुआ तो परिजनों ने शव को ग्राम पंचायत भवन के सामने ही अंतिम संस्कार करने का निर्णय लिया। इसकी जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ।पुलिस के हस्तक्षेप से बना रास्तासूचना मिलने पर पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद खड़ी फसलों के बीच से अंतिम यात्रा के लिए रास्ता बनाया गया। इसके बाद अंतिम यात्रा श्मशान घाट तक पहुंची और वृद्ध महिला का अंतिम संस्कार किया जा सका।सीईओ बोले, जांच कराकर होगी कार्रवाईमामले में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शैलेंद्र सिंह ने जांच कराने और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करने की बात कही है। हालांकि जांच कब तक पूरी होगी और किन स्तरों पर जिम्मेदारी तय की जाएगी, इस संबंध में फिलहाल कोई जानकारी सामने नहीं आई है।जवाबदेही पर उठे सवालघटना के बाद ग्रामीण व्यवस्थाओं और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। श्मशान घाट तक पहुंचने का रास्ता जैसी बुनियादी सुविधा ग्राम स्तर पर सुनिश्चित की जानी चाहिए, लेकिन सिमरिया में अंतिम यात्रा के लिए भी रास्ता उपलब्ध नहीं था। परिवार को शोक की घड़ी में घंटों इंतजार करना पड़ा और अंत में पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।सवाल यह भी है कि रास्ते की व्यवस्था की जिम्मेदारी किसकी थी और समय रहते इंतजाम क्यों नहीं किया गया। अगर परिजन पंचायत भवन के सामने अंतिम संस्कार का निर्णय नहीं लेते, तो क्या प्रशासन तब भी सक्रिय होता, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है।आश्वासन तक सीमित रहने की आशंकाअब देखना होगा कि सीईओ द्वारा घोषित जांच के बाद पंचायत स्तर के जिम्मेदारों पर कार्रवाई होती है या मामला आश्वासन तक ही सीमित रह जाता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच के साथ-साथ श्मशान घाट तक स्थायी रास्ते की व्यवस्था भी की जाएगी, ताकि भविष्य में किसी परिवार को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े।