ISI ने लोगों का ब्रेनवॉश करने के लिए बनाया प्‍लान, एजेंसी जॉब छोड़ने की कर रही अपील

नई दिल्लीः पाकिस्‍तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई लोगों का ब्रेनवॉश करने के लिए नए हथकंडे अपना रही है. वह ऐसी किताबें प्रकाशित कर रही जिसमें लोगों से जेहाद का रास्‍ता अख्तियार करने की अपील की गई है. दक्षिणी अफगानिस्‍तान के इलाकों में इस तरह की तकरीबन 20 हजार किताबें ये खुफिया एजेंसी वितरित कर चुकी है. ये पुस्तक अफगानिस्तान के लोगों को जिहाद में शामिल होने के लिए प्रेरित करती है. 

इन किताबों को पाकिस्‍तान और अफगानिस्तान के बीच तोरखम सीमा (Torkham border crossing) पार से भेजा गया है. पाक खुफिया एजेंसी ने दक्षिणी अफगान प्रांतों के अलावा अन्य अफगान प्रांतों जैसे नंगरहार, लोगर और जगनी में भी भेजा है.

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इस पुस्तक से पहले मध्य प्रांतों में वहां के लोकल कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के पास कुछ पम्पलेट्स और पत्र वितरित किए जाते थे. इन पम्पलेट्स और लैटर्स के जरिए नौकरीपेशा लोगों को काम छोड़ जेहाद के रास्‍ते पर चलने के लिए कहा जाता है. 

कई विश्‍लेषकों का मानना है कि पाकिस्‍तान, अमेरिका के अफगानिस्‍तान से हटने का इंतजार कर रहा है. वह इस पर्चों और किताबों के माध्‍यम से लोगों से जेहादी रास्‍ते पर चलने के लिए इसलिए कह रहा है ताकि वे तालिबान से जुड़ेंं. इससे निकट भविष्‍य में तालिबान फिर से ताकतवर बनकर उभर सकता है. 1990 के दशक में पाकिस्तान ने तालिबान का समर्थन किया था और उस समय देश में तालिबान सरकार को मान्यता देने वाले कुछ देशों में से एक था.

क्रिसमस तक अफगानिस्तान से वापस अमेरिका आएंगे सैनिक 
हाल ही में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अफगानिस्तान में बचे हुए सभी अमेरिकी सैनिक क्रिसमस तक देश में वापस आ जाएंगे. बता दें कि अफगानिस्तान में तालिबान के साथ लड़ाई के दौरान अब तक 2400 अमेरिकी सैनिकों की जान जा चुकी है जबकि कई हजार बुरी तरह घायल हुए हैं. ट्रंप ने ट्वीट कर जानकारी दी है कि फिलहाल अफगानिस्तान में बहुत कम संख्या में सैनिक तैनात हैं और अमेरिकी लोगों को यह अपेक्षा करनी चाहिए कि 25 दिसंबर तक बाकी बचे सैनिक भी देश में वापस आ जाएंगे.

गलत है तालिबान का अनुमान
सप्ताह के अंत में, अफगान सरकार के शीर्ष मध्यस्थ यानी वार्ताकार ने  WION के साथ बातचीत की. इस दौरान उन्होंने 1990 के किसी भी दोहराव को खारिज कर दिया. उन्होंने बताया, “तालिबान को लगता है कि कल, अगले महीने या आने वाले कुछ माह के बीच अमेरिका अफगानिस्तान से हट जाएगा और वे सैन्य रूप से उस स्थिति का लाभ उठाएंगे जो कि एक मिथ्या है (miscalculation) या कहें गलत अनुमान साबित हो सकता है.”

उन्होंने आगे कहा, ”इस बीच, अफगान सेना (Afghan Army) 4776 IED का पता लगाने और उसे डिफ्यूज करने में (detect and defuse) सक्षम रही है, जिसका इस्तेमाल तालिबान ने अराजकता फैलाने के लिए किया था. उन्होंने बताया कि IEDs में इस्तेमाल होने वाला अमोनियम नाइट्रेट और सफेद फास्फोरस का सोर्स पाकिस्तान है.” 




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