छतरपुर/पन्ना: विस्थापन का दंश झेल रहे ग्रामीण, केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी जैसी परियोजनाओं से विस्थापित हुए परिवारों का ‘चिता आंदोलन’ आज छठवें दिन भी पूरे जोश के साथ जारी है। भारी बारिश और प्रतिकूल मौसम भी इन ग्रामीणों के हौसले डिगा नहीं सका है।’न्याय दो या मार दो’ के नारों से गूंजा आंदोलन स्थलजय किसान संगठन के बैनर तले हो रहे इस प्रदर्शन ने अब एक उग्र रूप ले लिया है। आंदोलनकारी आदिवासियों का कहना है कि जब तक उनकी जायज मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे यहाँ से पीछे नहीं हटेंगे।आमरण अनशन और सत्याग्रह से बढ़ी प्रशासन की मुश्किलेंआंदोलन को नई धार देने के लिए सामाजिक कार्यकर्ता ‘अमित भटनागर’ ने मोर्चा संभाल रखा है। •आमरण अनशन: अमित भटनागर के आमरण अनशन का आज तीसरा दिन है। •मिट्टी सत्याग्रह: संघर्ष को मजबूती देने के लिए ग्रामीणों ने ‘मिट्टी सत्याग्रह’ शुरू किया है, जिसका आज दूसरा दिन है। •जल सत्याग्रह:आज से आंदोलनकारियों ने ‘जल सत्याग्रह’ का भी आगाज कर दिया है, जिससे आंदोलन का दायरा और व्यापक हो गया है।दूषित पानी पीने को विवश आदिवासी महिलाएं, बच्चे एवं सभी प्रभावित ग्रामीण : प्रशासन ने वहां पर जो पीने का पानी उपलब्ध था उसे बंद कर दिया अब जो प्रभावित आदिवासी महिलाएं, बच्चे, किसान वहां पर आंदोलन कर रहे हैं वह वहां का दूषित पानी पीने के लिए मजबूर हैं जिससे उनकी तबीयत बिगड़ रही हैप्रशासन से तनातनी और भ्रष्टाचार के आरोपआंदोलन स्थल पर बिजावर के तहसीलदार अभिनय शर्मा, सटई के तहसीलदार इंद्र कुमार गौतम और किशनगढ़ थाना प्रभारी कमलजीत सिंह मवई के पहुँचने पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन उनकी समस्याओं का समाधान करने के बजाय उन्हें डराने-धमकाने का प्रयास कर रहा है। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर ग्रामीणों ने कहा कि सरकारी कार्यालयों में बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता और उनकी आवाज को दबाने के लिए सरकारी तंत्र का दुरुपयोग किया जा रहा है।> “प्रशासन हमें डराने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह लड़ाई तब तक नहीं रुकेगी जब तक वास्तविक विस्थापितों को उनका हक नहीं मिल जाता और भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होती।”_अमित भटनागर, सामाजिक कार्यकर्ता क्या हैं आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें? 1. उचित मुआवजा और पुनर्वास: सभी विस्थापित परिवारों को भूमि और आवास का न्यायपूर्ण मुआवजा मिले। 2. उच्च स्तरीय जांच: परियोजनाओं में हुए कथित भ्रष्टाचार की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच हो। 3. दोषियों पर कानूनी कार्रवाई: भ्रष्टाचार के दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो और उन्हें जेल भेजा जाए। 4. उत्पीड़न पर रोक: विस्थापितों को डराने-धमकाने की प्रशासनिक कार्रवाई तुरंत बंद हो।आंदोलन स्थल पर डटे अमित भटनागर ने प्रशासन के दमनकारी रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा:”यह लोकतंत्र है और संविधान हमें अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने का हक देता है। प्रशासन स्वयं राज्य के कानूनों की अनदेखी कर रहा है। जब तक हर विस्थापित आदिवासी महिला, किसान और प्रभावित परिवारों को न्याय नहीं मिलता, तब तक यह लड़ाई रुकने वाली नहीं है।”फिलहाल, आंदोलन स्थल पर भारी आक्रोश व्याप्त है और ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। प्रशासन की ओर से अब तक कोई ठोस समाधान न निकल पाने के कारण स्थिति गंभीर बनी हुई है।


