शस्त्र–शास्त्र शिक्षा के लिए गुरुकुलम का शुभारंभ, सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में बड़ा कदम

छतरपुर । दुनिया भर में आस्था का केंद्र बन चुके बागेश्वर धाम में आयोजित एक कार्यक्रम के माध्यम से गुरुकुलम का शुभारंभ किया गया।इस अवसर पर संत-महात्माओं, विद्वानों और जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। बनारस से चार विद्वान आचार्य को गुरुकुलम की शिक्षा के लिए चयनित किया गया है। पहले चरण में 31 बच्चों को शिक्षित किया जाएगा। कार्यक्रम में प्रख्यात भागवताचार्य रमेश भाई ओझा, कथा वाचक संजीव कृष्ण ठाकुर, संत बाल योगेश्वर महाराज, बागेश्वर महाराज तथा मध्यप्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार विशेष रूप से उपस्थित रहे।

सभी अतिथियों ने कार्यक्रम का शुभारंभ किया और गुरुकुलम की इस पहल को सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। अध्यात्म और सेवा के प्रमुख केंद्र बागेश्वर धाम में आज एक नए स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत हुई। पूज्य संतों की गरिमामयी उपस्थिति में गुरुकुलम का भव्य शुभारंभ किया गया, जहाँ बटुकों को वैदिक ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा और शस्त्र विद्या से भी सुसज्जित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक अवसर के साक्षी बनने के लिए अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पूज्य भाईश्री (रमेश भाई ओझा) और सीहोर वाले पंडित प्रदीप मिश्रा बागेश्वर धाम पधारे।

धाम की गौशाला के समीप पूरी तरह प्राकृतिक परिवेश में तैयार किए गए इस गुरुकुल में प्रथम चरण में 31 बच्चों को प्राचीन भारतीय परंपरा के अनुसार दीक्षित किया जाएगा। बनारस के प्रकांड विद्वान आचार्यों के मार्गदर्शन में यहाँ के विद्यार्थी वेदों के साथ-साथ वर्तमान समय की तकनीक और आधुनिक विषयों का भी अध्ययन करेंगे। इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय कथावाचक पूज्य भाईश्री (रमेश भाई ओझा) ने बेटियों को ईश्वर का अनमोल उपहार बताया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि इंसान जीवन भर जो भी अच्छे काम और पुण्य करता है, भगवान उसके बदले में रसीद के रूप में उसे बेटी देते हैं। भाईजी ने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री की सराहना करते हुए कहा कि उनके भीतर सिद्धि और सरलता दोनों एक साथ वास करती हैं, जो एक दुर्लभ गुण है। उन्होंने 300 निर्धन कन्याओं के विवाह के इस महायज्ञ को मानवता की सच्ची सेवा बताया।

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भाईजी ने समाज को संदेश दिया कि दुनिया की इस भीड़ भरी यात्रा में हमें केवल हमसफर नहीं, बल्कि हमदर्द बनना चाहिए। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जब एक पिता के बिना बेटी खुद को अकेला महसूस करती है, तब बागेश्वर धाम जैसा समर्थ पिता उसका हाथ थामकर उसे भविष्य के सपने दिखाता है। जो लोग धाम के कार्यों पर सवाल उठाते हैं, उन्हें यह देखना चाहिए कि यहाँ का पुरुषार्थ बेटियों के घर बसाने में लग रहा है। अंत में उन्होंने नवविवाहित जोड़ों को सुखी जीवन का मंत्र और आशीर्वाद दिया।

दुनिया के भ्रम दूर कर सनातन की पहचान करा रहे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री: पंडित प्रदीप मिश्रा सुप्रसिद्ध कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा ने बागेश्वर धाम में आयोजित सामूहिक कन्या विवाह महोत्सव में सम्मिलित होकर बेटियों और समाज को मानवता का संदेश दिया। उन्होंने अपने संबोधन में गुजरात के रमेश भाई ओझा जी और बागेश्वर पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी का वंदन करते हुए कहा कि यह धाम केवल भूत-प्रेत भगाने की जगह नहीं, बल्कि लोगों के मन के भ्रम दूर कर उन्हें सनातन की सही पहचान दिलाने वाला स्थान है। पंडित मिश्रा ने कहा कि 300 बेटियों का यह विवाह केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव है।

उन्होंने विदा हो रही बेटियों से अपील की कि वे यहाँ से केवल दहेज और गृहस्थी का सामान लेकर न जाएँ, बल्कि यहाँ से मिले संस्कारों को अपने साथ ले जाएँ। उन्होंने भावुक होकर कहा कि इन बेटियों की गोद से जो संतान जन्म ले, वे उन्हें धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जैसा ऊर्जावान और सेवाभावी बनाएँ। उन्होंने समाज के युवाओं को मंत्र देते हुए कहा कि यदि आप किसी निर्धन बेटी की शादी नहीं करा सकते, तो कम से कम किसी भी बेटी को गलत नजर से न देखने का संकल्प लें; यह संकल्प भी एक कन्यादान के पुण्य के बराबर है।

जो लोग बागेश्वर धाम के सेवा कार्यों पर सवाल उठाते हैं, उन्हें यहाँ आकर देखना चाहिए कि कैसे संत समाज अपने संसाधनों का उपयोग बेटियों के घर बसाने, गौ-सेवा और गुरुकुल की स्थापना में कर रहा है। पंडित मिश्रा ने इस पावन आयोजन हेतु धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी को साधुवाद देते हुए उनके उज्जवल भविष्य की मंगलकामना की।

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