FCRA नियमों में बड़ा बदलाव: धार्मिक गतिविधियों की नई परिभाषा तय, धर्मांतरण को नहीं मिलेगी पात्रता

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम, 2026 को अधिसूचित करते हुए विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए अनुपालन संबंधी नियमों को और सख्त कर दिया है। नए संशोधनों के तहत धार्मिक श्रेणी में आने वाली स्वीकार्य गतिविधियों को स्पष्ट रूप से वर्गीकृत करने के लिए एक विस्तृत ढांचा तैयार किया गया है।संशोधित नियम विदेशी अंशदान (विनियमन) नियम, 2011 में बदलाव करते हैं और एक विशेष अनुसूची जोड़ते हैं, जिसमें उन गतिविधियों की सूची दी गई है जो धार्मिक उद्देश्यों के तहत पंजीकरण के लिए पात्र मानी जाएंगी।नई व्यवस्था के अनुसार मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा, मठ, सिनेगॉग और अन्य धार्मिक स्थलों के निर्माण, नवीनीकरण, संरक्षण और रखरखाव जैसी गतिविधियां धार्मिक श्रेणी के अंतर्गत मान्य होंगी। इसके अलावा धार्मिक शिक्षा, धार्मिक आयोजनों और परंपराओं के संरक्षण से जुड़ी कुछ गतिविधियों को भी निर्धारित शर्तों के तहत अनुमति दी गई है।हालांकि, संशोधित नियमों में एक महत्वपूर्ण प्रावधान यह है कि धर्मांतरण (Religious Conversion) से जुड़ी गतिविधियों को एफसीआरए के तहत पंजीकरण के लिए पात्र श्रेणियों से स्पष्ट रूप से बाहर रखा गया है। यानी विदेशी अंशदान प्राप्त करने वाले संगठन धर्मांतरण संबंधी गतिविधियों को धार्मिक उद्देश्य बताकर पंजीकरण या फंडिंग की पात्रता का दावा नहीं कर सकेंगे।गृह मंत्रालय का कहना है कि इन संशोधनों का उद्देश्य धार्मिक गतिविधियों की स्पष्ट परिभाषा तय करना, विदेशी फंड के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ाना और नियामकीय निगरानी को मजबूत बनाना है। नए नियमों के लागू होने के बाद विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले संगठनों को निर्धारित श्रेणियों और अनुपालन मानकों का सख्ती से पालन करना होगा।विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव धार्मिक संस्थाओं की गतिविधियों और विदेशी अंशदान के उपयोग को लेकर अधिक स्पष्टता लाएगा तथा एफसीआरए के तहत निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाएगा।

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