पूर्व विधायक अमित जोगी की पत्नी डॉ. ऋचा जोगी का आरोप है कि आधार कार्ड और जाति प्रमाणपत्र बनवाते समय उन्होंने जो जो पता दिया था, उस पर कोई नोटिस नहीं आया है. अमित जोगी ने भी ऐसी ही बात कही है. दोनों का आरोप है कि नोटिस जारी हुआ है या नहीं, इस बात की हमें कोई जानकारी नहीं है. पूर्व विधायक का आरोप है कि सरकार उनको और उनकी पत्नी को जान-बूझकर परेशान कर रही है. डॉ. ऋचा जोगी के जाति प्रमाणपत्र के विरुद्ध शिकायत की गई है, जिसके बाद प्रशासन की ओर से उनको नोटिस भेजकर पूंछताछ के लिए बुलाने की बात कही जा रही है.
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डेली छत्तीसगढ़ की रिपोर्ट के मुताबिक ऋचा जोशी का कहना है कि उनको प्रशासन की ओर से शिकायत की एक प्रति भी उपलब्ध नहीं कराई गई है. ऋचा जोगी ने कहा कि मैं अभी होमआइसोलेशन में हूं, इसलिए आज छानबीन समिति के समक्ष उपस्थित नहीं हो पाउंगी. डॉ. ऋचा जोगी ने कहा कि मुंगेली कलेक्टर ने मुझे कोई नोटिस भेजा है इस बात की जानकारी भी मुझे समाचार पत्रों के माध्यम से मिली है. उन्होंने कहा मुझे कोई नोटिस नहीं मिला है. राज्य सरकार द्वेष पूर्ण मेरे खिलाफ कार्रवाई कर रही है. नोटिस भेजना है तो मेरे घर में भेजें.
जिस पते पर मेरी धर्मपत्नी श्रीमती ऋचा जोगी ने अपने जाति प्रमाण पत्र का आवेदन किया था, जिस पते पर उसका आधार कार्ड बना है, उस पते पर आज तक कलेक्टर @MungeliDist ने उसे नोटिस क्यों नहीं भेजा है? साफ़ है कि वो उसे अपना पक्ष रखने का मौक़ा ही नहीं देना चाहते। ये जंगल राज है! संविधान1/2 pic.twitter.com/FfAezU1FoB
— Amit Ajit Jogi (@amitjogi) October 7, 2020
डॉ. ऋचा जोगी ने मुंगेली कलेक्टर से मांग की है कि उन्हें नोटिस और उनके जाति प्रमाण पत्र के विरुद्ध की गई शिकायत की प्रति उपलब्ध कराई जाए, जिससे उनको भी पता चले कि किस मामले में उनसे पूंछताछ होनी है. 24 सितम्बर 2020 को जारी किए गए नोटिफिकेशन के नियम 14 (1) के तहत राज्य सरकार को सात सदस्यीय जिला स्तरीय प्रमाण पत्र छानबीन समिति का गठन करना है. इस समिति का गठन अभी तक नहीं हुआ है. इसलिए जिला स्तरीय प्रमाण-पत्र छानबीन समिति और उसके द्वारा जारी किया गया तथाकथित नोटिस दोनों ही गैर कानूनी हैं.
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डॉ. ऋचा जोगी ने कहा कि वो हर तरह की जांच के लिए तैयार हैं और अपने सभी दस्तावेजों की प्रति जिला छानबीन समिति को भेज रही हैं. जिन दस्तावेजों के तहत उन्हें राज्य सरकार द्वारा यह जाति प्रमाणपत्र जारी किया गया था. इन दस्तावेजों में परिवार वालों के जाति प्रमाणपत्र जिसके आधार पर वह सरकारी नौकरी कर रही हैं, भूमि राजस्व रिकॉर्ड, वंश वृक्ष आदि शामिल हैं. यदि यह जाति प्रमाणपत्र गलत जारी हुआ है तो यह राज्य सरकार की पूर्ण रूप से अक्षमता को दर्शाता है.
डॉ. ऋचा जोगी ने कहा कि उन्हें मीडिया में घूम रहे 29 सितम्बर 2020 के नोटिस और उनके जाति प्रमाणपत्र के विरुद्ध दर्ज की गई शिकायत की प्रति उपलब्ध करवाई जाए. डॉ. जोगी ने कहा कि नोटिस और अन्य दस्तावेज मिलने के बाद जब भी छानबीन समिति उन्हें बुलाएगी, वो सुनवाई में उपस्थित हो जाएंगी.

