Murder and suicide in the name of dowry in Beed, Maharashtra, crime against women continues to grow in the district – महाराष्ट्र के बीड़ में दहेज के नाम पर हत्या और आत्महत्या, जिले में लगातार बढ़ता महिलाओं के खिलाफ अपराध

फिर एक दिन मनीषा की मौत की खबर आई. मनीषा की मौत को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई पर पुलिस की पूछताछ के बाद आरोपी ने हत्या करने की बात कबूली. मनोहर काले ने बताया, ‘शादी से पहले भी मेरे सिर पर कर्ज था, शादी के कुछ महीनों बाद ही मेरी बेटी बार बार फोन कर बता रही थी कि परिवारवाले बाइक और अंगूठी के लिए 2 लाख रुपये मांग रहे हैं..मेरे पास पैसे ही नहीं थे.’

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पुलिस निरीक्षक, श्रीकांत डोंगरे ने कहा, ’22 साल की नवविवाहित महिला मनीषा को उसके सास, ससुर और पति ने शारीरिक और मानसिक परेशानी दी और उसकी हत्या की. इन तीनों के खिलाफ मामला दर्ज कर कारवाई की गई है.’

वहीं दूसरी कहानी बीड के ही गन्ना मजदूर बाबूराव राठौड़ की है, राठौड़ ने अपनी बेटी वंदना की शादी चार महीने पहले करवाई थी. पर चार महीनों के भीतर ही लड़के वालों के परिवार की तरफ से ट्रेक्टर खरीदने के लिए 5 लाख रुपये की मांग की गई. लड़की के पिता ने पैसे की कमी और घर की परिस्थिति समझाने की कोशिश की पर हुआ कुछ नहीं. वंदना का शव कुएं में मिला. बाबूराव राठौड़, ‘मैंने मेरी बेटी को दहेज के वजह से खोया. शादी के समय भी पैसे दिए और उसके बावजूद लगातार पैसे की मांग की जा रही थी.’

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वंदना की मां बायनाबाई राठौड़ ने बताया, ‘हमारी पांच बेटियां हैं, पैसे हमारे पास बचे नहीं थे, बेटी का फोन आ रहा था तो कहते थे लॉकडाउन खत्म होने दो, कुछ इंतज़ाम करते हैं. इससे पहले भी हमने पैसा दिया था.’

आपको बता दें कि पिछले साल की तुलना में बीड में महिलाओं के साथ होने वाले वारदातों में बढ़ोतरी आई है. साल 2019 में छेड़छाड़ के जहां 181 केस सामने आए थे वहीं जुलाई 2020 इनकी संख्या 256 हो गई. ऐसे ही अगर हम बलात्कार के मामलों की बात करें तो साल 2019 में यह 65 थे जबकि इस साल अब तक 106 मामले सामने आ चुके हैं. वहीं दहेज के केस पिछले साल भी 9 थे और उस साल भी इनकी संख्या अभी तक इतनी ही है. वहीं उत्पीड़न के मामलों में 95 के मुकाबले 266 केस सामने आए हैं. जिले में गैर इरादतन हत्या 2019 में जहां 25 केस थे वहीं इस साल अब तक 33 मामले दर्ज किए जा चुके हैं.

कॉउंसलिंग अधिकारी कमल वाघमारे बताते हैं. ‘दहेज में केवल गाड़ी और पैसे नहीं, दैनिक इस्तेमाल में आने वाला सामान, बच्चों के कपड़े. यह सारी चीजों की मांग भी लोग करते हैं. लड़की की आर्थिक ज़िम्मेदारी घर वाले नहीं लेते हैं.’

प्रशासन अब मामलों को देखते हुए और कड़े कदम उठाने की बात कर रहा है. 

 


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