वाशिंगटन: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) अंतरिक्ष यात्रियों की सुविधा के लिए शौचालय के विकास पर 23 मिलियन डॉलर (लगभग 167.9 करोड़ रुपए) खर्च करेगी. यह शौचालय अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में लगाए जाएंगे. नासा गुरुवार 1 अक्टूबर को ये नए डिजाइन के शौचालय अंतरिक्ष में भेजेगी.
हल्के और आकार में छोटे
इन शौचालयों को अंतरिक्ष स्टेशन पर विशेषकर महिला अंतरिक्ष यात्रियों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किया गया है. इन शौचालयों को यूनिवर्सल वेस्ट सिस्टम(यूड्ब्ल्यूएमएस) नाम दिया गया है. यह पहले के शौचालयों के मुकाबले 65 फीसदी हल्के और 40 फीसदी छोटे हैं. अंतरिक्ष यात्रियों के लिए अभी भी वर्ष 1990 में बनाया कचरा संग्रहण सिस्टम ही इस्तेमाल में लाया जाता है.
महिला अंतरिक्ष यात्रियों के लिए सुविधाजनक
नए शौचालयों को बनाने के पीछे अंतरिक्ष स्टेशन में महिला अंतरिक्ष यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखना था. पहले के शौचालयों में अंतरिक्ष यात्री या तो पेशाब कर सकते थे या मल त्याग सकते थे. लेकिन दोनों काम एक साथ नहीं कर सकते थे. नए सिस्टम में यह दोनों सुविधाएं मौजूद हैं. नए डिजाइन में रखरखाव की भी कम जरूरत पड़ती है. हालांकि इसमें मल त्यागना पहले के मुकाबले आसान हुआ है लेकिन इसका निस्तारण अभी भी समस्या बना हुआ है. अभी इसे एयरटाइट बैग में रखा जाता है. इसके बाद कार्गो में रखकर वापस धरती पर भेजा जाता है. दूसरी तरफ पेशाब को फिल्टर कर अंतरिक्ष स्टेशन पर इसका पुनः प्रयोग कर लिया जाता है.
पहले प्लास्टिक ट्यूब का लिया जाता था सहारा
शुरुआती दिनों के अंतरिक्ष यान में शौचालय नहीं होते थे. वर्ष 1961 में अंतरिक्ष यात्री एलन शेपर्ड को अपने स्पेस सूट में निवृत्त होना पड़ता था. पहले अंतरिक्ष स्टेशन में मूत्र त्याग के लिए प्लास्टिक ट्यूब का सहारा लिया जाता था लेकिन इसमें महिला यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था.
बता दें कि अंतरिक्ष स्टेशन पर गुरुत्व की कमी के कारण शौचालयों का निर्माण हवा के प्रवाह को ध्यान में रखकर किया जाता था.
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