प्योंगयांग: तमाम अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते आर्थिक तंगी झेल रहा उत्तर कोरिया (North Korea) अवैध रूप से रेत बेच रहा है, ताकि सरकारी खजाने को भरा जा सके. पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बने उत्तर कोरिया पर प्रतिबंधों के उल्लंघन के आरोप भी लगते रहे हैं. पिछले साल अमेरिका सहित 25 देशों ने कहा था कि वह पांच लाख बैरल परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद की सीमा से अधिक आयात करके संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों का उल्लंघन कर रहा है.
इससे पहले, प्योंगयांग पर भारी मात्रा में अवैध रूप से कोयला और अन्य सामान बेचने का आरोप लगाया गया था. CNN के अनुसार, कस्टम अधिकारियों और संयुक्त राष्ट्र के रडार से बचने के लिए उत्तर कोरिया रेत को एक जहाज से दूसरे जहाज में ले जाता है. रिपोर्टों से पता चलता है कि 279 जहाज वर्तमान में उत्तर कोरियाई समुद्रों के चारों ओर चक्कर लगा रहे हैं. आशंका है कि इनसे लाखों डॉलर का अवैध व्यापार किया जा रहा है.
अवैध हथियारों, ड्रग्स, पैसे और जानवरों, या कोयले के परिवहन के लिए जहाजों का उपयोग करने के साथ ही अब रेत को भी समुद्री मार्ग से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा रहा है. उत्तर कोरिया अब तक कोयले के अवैध व्यापार के लिए बदनाम है, जिससे उसे काफी लाभ होता है. लेकिन इस सूची में अब रेत भी शामिल हो गई है.
रिपोर्ट में हुआ था खुलासा
दिसंबर 2017 से लागू संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों के तहत उत्तर कोरिया पत्थर आदि का निर्यात नहीं कर सकता. लिहाजा, उसके द्वारा रेत बेचना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है. UN के जांचकर्ताओं ने पाया था कि उत्तर कोरिया ने 2019 में रेत निर्यात से $22 मिलियन कमाए. इस संबंध में एक रिपोर्ट अप्रैल में जारी की गई थी. रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर कोरिया ने मई-दिसंबर 2019 के बीच विदेशों को एक मिलियन टन रेत भेजी थी.
दुनिया भर में इतना कारोबार
तानाशाह किम जोंग उन (Kim Jong-un) की यह कवायद देश को आर्थिक संकट से बाहर निकालना है, ताकि भविष्य की रणनीतियों को बिना किसी परेशनी के अमल में लाया जा सके. रेत का व्यापार वैसे तो सामान्य लगता है, लेकिन यह बेहद महत्वपूर्ण है. यह कंक्रीट, कांच, और यहां तक कि उन प्रोसेसर का मुख्य घटक है जो इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बिजली देते हैं. दुनिया में हर साल 50 बिलियन टन रेत की खपत होती है, जो पानी को छोड़कर किसी भी अन्य संसाधन की तुलना में सबसे ज्यादा है. हालांकि, रेत के अवैध व्यापार के गंभीर पर्यावरणीय प्रभाव हो सकते हैं.
चीन सबसे बड़ा खरीदार
2008 में, उत्तर कोरिया दक्षिण कोरिया को बड़े पैमाने पर रेत बेच रहा था, जिसकी कीमत लगभग 73.35 मिलियन डॉलर थी, लेकिन कुछ ही समय बाद यह डील रद्द हो गई. फ़िलहाल चीन उत्तर कोरिया का सबसे बड़ा रेत खरीदार बना हुआ है, क्योंकि वह किसी भी अन्य देश की तुलना में अधिक रेत इस्तेमाल करता है.

