छतरपुर: केन-बेतवा लिंक परियोजना के डूब क्षेत्र में प्रभावित आदिवासियों और किसानों का आंदोलन 11वें दिन और उग्र हो गया है। ‘चिता आंदोलन’ के बाद अब प्रदर्शनकारियों ने केन नदी के बीचों-बीच ‘सांस्कृतिक फांसी’ लगाकर प्रशासन के खिलाफ अनोखे तरीके से विरोध दर्ज कराया।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि मुआवजा वितरण में भारी अनियमितताएं हो रही हैं। आदिवासी महिलाओं और किसानों ने कहा कि जमीन के बदले मिलने वाली राशि में भेदभाव और भ्रष्टाचार किया जा रहा है, जिससे उनका भविष्य असुरक्षित हो गया है। विस्थापन को लेकर भी अब तक स्पष्ट योजना सामने नहीं आने से लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है।
Akhilesh Yadav ने ट्वीट कर भाजपा सरकार को घेरते हुए आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों का समर्थन किया है।वहीं प्रशासन का कहना है कि सर्वे और मुआवजा प्रक्रिया नियमानुसार की जा रही है और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की शिकायतों की जांच की जाएगी। बावजूद इसके, ग्रामीणों और प्रशासन के बीच गतिरोध बना हुआ है।


